अल्लाह की खुद की गवाही-धरती भी माता  होती है

  • 2016-04-13 09:30:45.0
  • बीएन शर्मा
अल्लाह की खुद की गवाही-धरती भी माता  होती है

हजारों  साल  से  भारत   के  हिन्दू  भारत भूमि  को  अपनी  माता  मान  कर ,  उस पर सम्मान प्रकट  करने के  लिए भारत माता  की जय   का  नारा  लगाते  आए  हैं,  लेकिन  मुसलमानों  की  आदत है, कि वह  किसी  न  किसी  कुतर्क   का  सहारा  लेकर  हिन्दुओं  की  मान्यताओं  और  आस्थाओं   का  विरोध  जरूर   करते  है ,  सब  जानते  हैं  कि  कुछ  ही  समय  पहले  जे एन  यू  के  मुस्लिम  लडके  के   इशारे से   हिन्दू लडक़ों   ने भी   देश  विरोधी   नारे  लगाए  थे,  और  उनका  परोक्ष  समर्थन  राहुल  गांधी  ने  कर  दिया,  इस  से पूरे  देश में  भारत  विरोधी  माहौल  पैदा  होने लगा,  इसलिए   सरसंघ  चालक  श्री  मोहन  भागवत  ने कहा  था कि  भारत  के सभी    लोगों  के  लिए  भारत  माता  की  जय  बोलना  अनिवार्य  कर  दिया जाना  चाहिए, लेकिन  जिस  दिन  भागवत  जी  ने  यह  बात   कही, उसके  कुछ   समय बाद ही, दिनांक  1  अप्रैल   2016  को   दारुल उलूम   देवबंद    के  मुल्लों   ने    एक  फतवा   जारी  कर  दिया  जिसमें  मुसलामानों    को  निर्देश  दिया  गया  है, कि  वह  न तो वन्दे  मातरम  गायें  और  न  भारत  माता  की जय बोलें,.और मुल्लों ने यह तर्क देकर फतवा जारी करते हुए दारुल उलूम ने कहा-इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है?

दुर्भाग्य  से  भारत   में  आर्यसमाज, विश्व  हिन्दू  परिषद, हिन्दू  महा  सभा   जैसे   संगठन  मौजूद  हैं, जिनमें हजारों     विद्वान्  हैं ,  लेकिन  किसी   ने  भी   मुल्लों   के  इस कुतर्क  का  मुंह तोड़  जवाब   नहीं  दिया,   यहाँ  तक  कि महेंद्र  पाल आर्य   जैसे    पूर्व   इमाम   ने भी   मुल्लों  का खंडन  नहीं    किया, उलटे  कई  हिन्दू नेताओं   ने  यहाँ  तक कह दिया  कि हम  लोगों  पर  भारत  माता  की  जय  बोलने का दवाब   नहीं   डालेंगे,  ऐसा कहने के पीछे  इन  धर्म के ठेकेदारों  की घोर  अज्ञानता   है,  जैसे  मुल्लों  ने मुसलमानों  को  कट्टर  और लकीर  का  फक़़ीर  बना दिया,  इन  हिन्दू  नेताओं  ने हिन्दुओं की  तर्क बुद्धि  पर  ताला   मार  दिया, हिन्दुओं  के  दिमागों   में यह  बात  ठूंस ठूंस  कर  भर दी  गयी कि हिन्दू  धर्म  सर्वश्रेष्ठ सबसे  बड़ा   है,  इस गलत  फहमी   से  हिन्दू    न  तो  अन्य  धर्म की  जानकारी  प्राप्त  करते  है  और  न    उनका  तुलनात्मक   अध्ययन   ही करते  हैं, मुल्लों  को  जवाब देने की  बात  तो   दूर  है, और  जब  मुल्लों   के  फतवा   का जवाब देने के लिए  कोई आगे  नहीं  निकला  तो, हमने  मुल्लों    को    जवाब देने  का  निश्चय   किया,  क्योंकि  कल  रात  को  9 बजे  अमेरिका के  सेंट  लुइस  निवासी  मेरी  बहिन रेणु  शर्मा  से मैंने वादा   कर दिया था .अत:  हम  अपना  वादा पूरा करने के लिए फ़तवा  के झूठ  का  भंडा  फोड़  रहे   हैं,

1-मुल्लों    ने  फतवा में   यह  कुतर्क  दिया इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? इस फ़तवा को  पढ़  कर   हम  दावा  करते   हैं   कि  या  देवबद  में  मुल्लों   को  कुरान का  इल्म   नहीं, या  वह   जानबूझ   कर  लोगों   को  गुमराह   कर   रहे   हैं, और   कुरान की  उस आयत  को  झूठा  साबित  करने की   हिमाकत  कर  रहे  हैं  जिसमे अल्लाह  ने  एक  शहर   (जमीन )   को  शहरों  की   माता  कहा  है,    और  जब खुद अल्लाह  पूरी  जमीन   के  एक  हिस्से  या एक   शहर   को शहरों  की   माता कहता  है, तो  हमें स्वीकार   करना  होगा  कि  निर्जीव  जमीन   के  बच्चे  भी  हो सकते हैं।
2-शहरों  की माता  मक्का  है

मुसलमान   जिस मक्का  शहर को  परम  पवित्र   मानते  हैं   ,  उस  शहर मक्का- नाम  पूरी  कुरान   में नहीं  मिलता,  बल्कि  इसकी  जगह  बक्कह- शब्द  मिलता  है, जो कुरान की  सूरा-आले  इमरान   3.96  में   है,  अरबी   व्याकरण  के  अनुसार बक्कह-शब्द    स्त्रीलिंग अर्थात   बक्कह   वत्र्तमान  मक्का     एक   स्त्री   है, इसीलिये  स्त्री  होने के  कारण  अल्लाह ने बक़्का ( मक्का )  को शहरों  की  माता    कह   दिया, यह  अति  महत्त्व  पूर्ण  बात  अल्लाह  ने  सिर्फ  एक  बार  कुरान    की सूरा-आले इमरान  6.92  में  दी   है,  पूरी  आयत   यहां हिंदी  लिपि   में  और  हिंदी-अंगरेजी   अर्थ   दिए  जा  रहे  हैं ।
1.- मूल अरबी आयत

وَهَـٰذَا كِتَابٌ أَنزَلْنَاهُ مُبَارَكٌ مُّصَدِّقُ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَلِتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا ۚ وَالَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَهُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ

2 -हिंदी लिप्यांतरण व् हाजा   किताबुं  अंजलनाहु ,मुबारकुन  मुसद्दिकु  अल्लजी  बैन यदीहि  व् लि तुंजिर  उम्मुल कुरा  व्  मन  हौलहा  वल्लजीना  यूमिनून बिल  अखिरती यूमिनूंन  बिही व् हुम् अला  सलातिहिम युहाफिजून
3-हिंदी  अनुवाद

यह किताब  जिसे हमने उतारा   है, बरकत वाली  है, और उसकी  पुष्टि  करने  वाली  है, जो  इस से पहले उतारी  गयी, ताकि  तुम  नगरों  की  माता  (मक्का ) और आसपास वालों को सचेत  करो, और जो लोग आखिरत  पर ईमान  लाते  हैं  वे  अपनी  नमाज  की  रक्षा  करते  हैं
4-Eng  Translation

"this  book We have revealed it,blessed,confirming which (came) before its hands,so that you may warn (the) mother(of) the cities

   and who(are) around it.And those who   believe  in the Hereafter,they believe  in it,and they, over  their prayers  (are) guarding.  "

नॉट  - इस आयत  में  अरबी  के कुल 22  शब्द  हैं  ,10  वां  शब्द  उम्म-है, इसका अर्थ  माता है  और 11 वां शब्द कुरा-   है जो  बहुवचन इसका अर्थ  नगरों , और उम्मुल  कुरा-का अर्थ नगरों  की  माता  है। दारूल उलूम देवबंद ने ‘भारत माता की जय’ के खिलाफ फतवा देते हुए कहा कि इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है, तो धरती मां कैसे हो सकती है। अब  देवबंद  के  मौलवी बताएं   कि जब  तुम्हारा  अल्ल्लाह  बेजान  भूमि   यानि   मक्का  को  शेरोन  की  माता  कह  रहा  है,  यानि मक्का  को  ऐसी माता   मान  रहा  है  कई  शहर  रूपी   बच्चे  हों   ,  क्योंकि  बिना   बच्चे की   स्त्री  को  माता   नहीं   कहा   जा  सकता, और  जब  एक शहर  मक्का  कई  शहरों  की  माता   हो  सकती    है,  तो  कई  प्रांतो, सैकड़ों    शहरों  पैदा करने  वाली   भारत  माता ,   सबकी  माता  क्यों    नहीं       मानी   जा  सकती   ? मेरी  सभी  मुल्ले मौलवियों,  मुफ्तियों,  और मुसलमानों  को  खुली  चुनौती   है, कि  वह  कुरान की  इस  आयत   को  गलत  साबित  कर के  दिखाए, फिर   कहें की जमीन   कभी  माता  नहीं हो  सकत, मेरा उन  सभी हिन्दू नेताओं और हिन्दू  संगठनों के प्रमुखों से  अनुरोध  है, जो  खुद को  भारत  माता  के भक्त होने  का  दावा   करते   हैं, इस  लेख   को  अखबारों  और  टीवी  वालों   को  भेज   दें, ताकि   देवबंदियों  का फतवा  फट  जाये,  भारत  माता  की जय, भारत  माता  की जय, भारत  माता  की जय।
-बीएन शर्मा