छोटा राजन को देश और दलितों का आदर्श मत बनाइये

  • 2015-11-09 10:59:05.0
  • भंवर मेघवंशी

भंवर मेघवंशी

अंडरवल्र्ड डॉन छोटा राजन की इंडोनेशिया के बाली शहर में नाटकीय गिरफ्तारी तथा उसका आनन फानन में भारत लाया जाना किसी पूर्व निर्धारित पटकथा जैसा लगता है .संभव है कि यह कवायद काफी दिनों से की जा रही हो ,जिसे एक खुबसुरत मोड़ दे कर इस अंजाम तक पंहुचाया गया है . केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस बात से इत्तेफाक रखते है ,वे मानते है कि इस दिशा में काफी समय से काम चल रहा था .इसका मतलब यह हुआ कि छोटा राजन की गिरफ्तारी पूर्वनियोजित घटनाक्रम ही था .

वैसे तो यह माना जाता रहा है कि भारतीय ख़ुफिय़ा एजेंसियां उसकी लम्बे वक़्त से मददगार रही है तथा उसे मोस्टवांटेड अंडरवल्र्ड माफिया दाउद इब्राहीम के विरुद्ध एक तुरुप के पत्ते के रूप में संभाल कर रखे हुए थी मगर यह भी एक सम्भावना हो सकती है कि वर्तमान केंद्र सरकार में भी छोटा राजन के प्रति हमदर्दी रखनेवाले कुछ लोग हो ,जिन्होंने उसकी ससम्मान गिरफ्तारी का प्रबंध करने में अहम् भूमिका अदा की हो ? फि़लहाल किसी भी सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है .जैसा कि हम जानते है कि अपराध जगत के सत्य उजागर होने में थोडा समय लेते है ,इसलिए वक़्त का इंतजार करना उचित होगा . छोटा राजन की गिरफ्तारी होते ही सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन के एक प्रमुख सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास अठावले की प्रतिक्रिया आई ,उन्होंने कहा कि छोटा राजन को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह दलित है ,जबकि दाउद को नहीं .अठावले के बयान से देश को छोटा राजन की जाति का पता चला.तथ्यात्मक रूप से यह बात सही है कि उसका जन्म 1956 में मुंबई के चेम्बूर इलाके में एक मध्यमवर्गीय दलित परिवार में हुआ था .वह मात्र 11 कक्षा तक पढ़ा कि उसके पिता जो की जो कि एक मिल में नौकरी करते थे ,उनकी नौकरी छूट गयी .आर्थिक तंगी के चलते उसने पढाई छोड़ दी और सिनेमा के टिकट ब्लेक करने लगा .यह काम उसके लिए अपराध जगत का प्रवेशद्वार बना .यहीं से वह राजन नायर नामक माफिया की नजर में चढ़ा जो उस वक्त बड़ा राजन कहलाता था .उसके साथ मिलकर छोटा राजन ने अवैध वसूली ,धमकी ,मारपीट और हत्याएं तक की .1983 में जब बड़ा राजन को गोली का शिकार हो गया तब उसका अपराध का साम्राज्य राजेन्द्र सदाशिव निखिलांजे उफऱ् छोटा राजन को संभालना पड़ा .फिर उसकी माफिया किंग दाउद से दोस्ती हो गयी .दोनों ने मिलकर काले कारोबार और क्राइम में जमकर भागीदारी निभाई .उनकी दोस्ती इतनी प्रगाढ़ हो गयी थी कि जब पुलिस के शिकंजे से बचने के लिए दाउद दुबई भागा तो वह अपने साथ छोटा राजन को भी ले गया .

दाउद और छोटा राजन का रिश्ता 1992 तक गाढ़ी दोस्ती का रहा ,लेकिन छोटा राजन की मुंबई पर बढती पकड़ से सतर्क हुए दाउद ने उसके साथ विश्वासघात करना शुरू कर दिया .एक तरफ तो साथ में सारे काले कारोबार ,दूसरी तरफ छोटा राजन के खास सहयोगियों पर अपने शूटरों द्वारा प्रहार ,दो तरफ़ा खेल खेल रहा था दाउद .शुरू शुरू में तो छोटा राजन को यह महज़ संयोग लगा लेकिन जब उसके खास साथी बहादुर थापा और तैय्यब भाई की हत्या में दाउद का हाथ होने की पुष्टि हुयी तो दोनों के मध्य दरार आ गयी जो 1993 के मुंबई बम्ब विस्फोट से एक ऐसी खाई में बदल गयी ,जिसे फिर कभी नहीं पाटा जा सका .एक ज़माने के खास दोस्त अब जानी दुश्मन बन चुके थे .फिर जो गेंगवार मुंबई में चली उसने पुलिस का काम सरल कर दिया .माफिया एक दुसरे को ही मार रहे थे .पुलिस का काम वो खुद ही करते रहे और एक दुसरे को निपटाते रहे .इस तरह मुंबई से माफिया का सफाया होने लगा .दाउद मुंबई बम धमाकों के बाद कराची में रहने लग गया तथा ष्द्धशह्लड्ड ह्म्ड्डद्भड्डठ्ठवह आई एस आई के हाथो की कठपुतली बन गया और छोटा राजन अपनी सुरक्षा के लिहाज़ से बैंकाक भाग गया .भारत से दूर दुनिया के दो अलग अलग देशों से दोनों के बीच दुश्मनी और जंग जारी रही . भारत सरकार दोनों को भारत लाने की वचनबद्धता दोहराते रही पर कामयाब नहीं हो पाई ..और अब अचानक अंडरवल्र्ड डॉन छोटा राजन सहजता से बाली पुलिस के हत्थे चढ़ गया .वहां की सरकार ने भी बिना कोई हील हुज्जत किये आराम से इतने बड़े अपराधी को भारत को परोसने को एकदम से राज़ी हो गयी !

अंतत: 27 साल के लम्बे अरसे बाद 6 नवम्बर 2015 की सुबह 5 बजकर 45 मिनट पर 55 वर्षीय अंडरवल्र्ड डॉन छोटा राजन की भारत में वापसी हो गयी .मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक डॉन ने दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरते ही भारत भूमि को चूमा ,धरती माता (भारत माता ) को प्रणाम किया .छोटा राजन के इस एक कारनामे से राष्ट्र निहाल हो गया और देश में उसके लिए सकारात्मक माहौल बनने लग गया . संभव है कि आने वाले समय में उसे आतंकवाद के खिलाफ जि़न्दगी भर लडऩेवाला योद्धा भी मान लिया जाये .जिस तरह से उसकी गिरफ्तारी की पूरी घटना कारित की गयी है ,वह इसी तरफ कहानी के आगे बढऩे का संकेत देती है .

क्या यह महज़ संयोग ही है कि छोटा राजन का एक भाई दीपक निखिलांजे उस रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया का बड़ा नेता है ,जिसके नेता ने छोटा राजन के प्रति सबसे पहले हमदर्दी जताई है .दीपक हाल ही में प्रधानमंत्री की मुंबई यात्रा के दौरान उनके साथ मंच पर भी दिखाई दिया था ,उसी पार्टी के नेता और भाजपा के सहयोगी दलित नेता रामदास अठावले छोटा राजन को दलित बता कर एक वर्ग की सहानुभूति बनाने का प्रयास करते है . क्या इसे भी सिर्फ इत्तेफाक ही माना जाये कि छोटा राजन का साला राहुल वालनुज सिर्फ एक महीने पहले शिवसेना छोडक़र भाजपा में शामिल होता है और भाजपाई श्रमिक संगठन राष्ट्रीय एकजुट कामगार संगठन का उपाध्यक्ष बनाया जाता है .छोटा राजन के परिजनों की भाजपा से लेकर प्रधानमंत्री तक की परिक्रमा और रामदास अठावले का दलित सम्बन्धी बयान सिर्फ संयोग मात्र नहीं हो सकते है ,इतना ही नहीं बल्कि छोटा राजन के एक भाई आकाश निखिलांजे का यह कहना कि -वह कोई आतंकी नहीं है और अब खुद छोटा राजन द्वारा मीडिया के समक्ष अपने आपको मुंबई पुलिस का प्रताडि़त पीडि़त बताना और यह कहना कि मुंबई पुलिस ने दाउद के इशारों पर उस पर बहुत अत्याचार किये है .बकौल छोटा राजन मुंबई पुलिस में दाउद के बहुत सारे मददगार है ,जिनके नामों के खुलासे होने के दावे किये जा रहे है .

ऐसा लग रहा है कि छोटा राजन के साथ एक अपराधी सा बर्ताव नहीं करके उसे भारत के खास देशभक्त हिन्दू डॉन के रूप में प्रस्तुत करके उसका राजनितिक लाभ लेने का प्रयास किया जा रहा है ,उसके पक्ष में हवा बनायीं जा रही है .छोटा राजन के बयान और भारत सरकार के बयान सब एक खास तरह का माहौल और कथ्य निर्मित कर रहे है .छोटा राजन ने कह दिया है कि वह जि़न्दगी भर आतंकवाद के खिलाफ लड़ा है और आगे भी लड़ता रहेगा .तो इसका मतलब यह निकाला जाये कि अब 70 आपराधिक मामलों में वांछित अपराधी आतंक से लडऩे वाला हीरो बना दिया जायेगा ( ऐसे अपराध जिनमे 20 हत्या के और 4 आतंक निरोधक कानून के अंतर्गत भी मामले है ) यह आतंकवाद को धर्म ,सम्प्रदाय और रंग के चश्मों से देखनेवाली एक खास किस्म की विचारधारा की सफलता नहीं है ? वैसे तो सत्तासीन गठबंधन के लिए छोटा राजन हर दृष्टि से मुफीद है ,वह दलित है ,उसका परिवार अम्बेडकरवादी नव बुद्धिस्ट परिवार रहा है ,उसकी माँ लक्ष्मी ताई निखिलांजे ने मुंबई के तिलकनगर में एक बुद्ध विहार बनवाने में अहम् भूमिका निभाई थी ,वह मुंबई पुलिस से प्रताडि़त एक स्वधर्मी डॉन है ,जिसने बाबरी मस्जिद ढहा दिये जाने के बाद मुंबई धमाकों का बदला लेने वाले धर्मांध और देशद्रोही दाउद के खिलाफ लम्बी जंग लड़ी ,सन्देश साफ है कि जो काम भारत की सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों को करना चाहिए था वह अकेले छोटा राजन ने किया है ,वह कथित इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ लडऩे वाला वतनपरस्त भारतीय है ,उसका सम्मान होना चाहिए ,उसकी सुरक्षा होनी चाहिए और उसकी मदद से हमें दाउद जैसे दरिन्दे को धर दबोचना चाहिए ।