भ्रष्टाचार मुक्ति के लिए केंद्र का बड़ा कदम

  • 2015-10-30 08:00:16.0
  • सुरेश हिन्दुस्थानी

भारत में पिछले 60 वर्षों में जो विसंगतियां पैदा हुईं हैं उसे दूर करने के प्रयासों में सरकार की उतनी सक्रियता नहीं देखी गई, जितनी देशवासियों में आशा थी। इसके परिणाम स्वरूप देश में यह धारणा आम प्रचलन का हिस्सा बन गई कि भ्रष्टाचार तो समाप्त हो ही नहीं सकता। इस धारणा के दायरे में जिस प्रकार के वातावरण का निर्माण हुआ उससे समाज का हर वर्ग प्रभावित हुआ। यहां तक कि बुराई से बहुत दूर रहने वाले व्यक्ति भी इस मामले में निष्क्रिय होते गए, इसके बाद भारत में सुधार की उम्मीदों पर एक बहुत बड़ा विराम स्थापित हो गया। कहा जाता कि भारत की दुर्गति में अन्याय करने वाले लोग तो दोषी हैं ही, इसके साथ ही उनका भी दोष कम नहीं कहा जा सकता जो सब कुछ जानते हुए निष्क्रिय होकर समाज और देश की दुर्गति का तमाशा देखते रहे। देश में चाहे भ्रष्टाचार का मामला हो या फिर असामाजिक कृत्यों का। सरकारों ने हमेशा ही ऐसे मामलों में अनदेखा रवैया ही अपनाया।


वर्तमान में प्रचलित धारणा है कि किसी अच्छे काम का प्रारंभ अगर शक्तिशाली और नीति निर्धारकों द्वारा किया जाता है तो उसकी व्यापकता का प्रभाव समाज के निचले स्तर तक अवश्य ही पहुंचता है। देश में लम्बे समय से भ्रष्टाचार के मामले में इसी प्रकार की कार्रवाई की आशा की जा रही थी। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार से देश में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का प्रयास किया है, उसका असर भी दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री ने गैर राजपत्रित पदों के लिए लिए जाने वाले साक्षात्कार को समाप्त करके अभूतपूर्व कदम का सूत्रपात किया है। इससे जहां भ्रष्टाचार को समाप्त करने में सहयोग मिलेगा, वहीं देश में व्याप्त बेरोजगारी की समस्या का सामना कर रहे युवाओं को भी काफी सहूलियत मिलेगी। वर्तमान में यह देश की सबसे बड़ी समस्या मानी जा सकती है कि देश का युवा जोश पूरी तरह से समस्या के निराकरण के लिए नहीं सोच रहा, इसके पीछे यह भाव अंतर्निहित है कि देश के युवाओं को सरकारों ने उस राह पर ले जाने का प्रयास नहीं जो देश के निर्माण में सहायक होती है। हम यह भलीभांति जानते हैं कि किसी भी देश की ताकत उस देश की युवा शक्ति होती है। लेकिन यह बात भी सही है कि इस युवा शक्ति सकारात्मक मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में प्राय: कहा करते थे कि हम वादे नहीं इरादे लेकर आए हैं। वास्तव में हर बार राजनीतिक दलों द्वारा देश के सामने इतने वादे परोस दिए जाते थे कि हर आदमी परेशान हो जाता था, इतना ही नहीं राजनीतिक नेता इन वादों को भूल भी जाता था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी कार्यशैली के माध्यम से अपनी कही हुई बात को चरितार्थ कर दिया है कि हम वादे नहीं इरादे लेकर आए हैं। इससे एक बात यह भी कही जा सकती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी कही हुई बात पर अमल करते हैं। जैसी कथनी वैसी करनी वाली उक्ति को अक्षरश पालन करने वाली मोदी सरकार हमेशा 125 करोड़ भारतीयों के लिए बात करते हैं। इसमें देश का किसान, युवा, महिलाएं सभी शामिल हैं। गैर राजपत्रित पदों के लिए साक्षात्कार को समाप्त करके नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश में नौकरियों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने का अभियान चलाया है। मोदी ने कहा कि मात्र पांच मिनट के साक्षात्कार से युवाओं की वास्तविक योग्यता का पता नहीं लगाया जा सकता। यह बात सही है कि किसी की क्षमता और प्रतिभा का आंकलन करने के लिए सतही काम कराने की आवश्यकता होती है, इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि क्षमताओं का सही प्रदर्शन तो मैदान में ही होता है। कमरे में बैठकर केवल बीच के रास्ते निकाले जाते हैं। वर्तमान में ऐसा कई अवसरों पर अनुभव किया गया है कि बीच के रास्ते से कई लोग सरकारी नौकरियों में पद पाने में सफल हो गए हैं। उत्तरप्रदेश के एक विद्यालय की बात है जिसमें एक जिम्मेदार अधिकारी एक विद्यालय का निरीक्षण करने जाता है, उस समय विद्यालय में उपस्थित एक शिक्षक से दो का पहाड़ा सुनाने को कहा जाता है, तब जवाब में शिक्षक ने पहाड़ा तो नहीं सुनाया, अधिकारी से ही प्रश्न पूछ लिया कि आप 29 का पहाड़ा सुना दीजिए। अधिकारी भी दाएं बाएं देखता रहा, लेकिन पहाड़ा वह भी नहीं सुना पाया। अधिकारी बिना कोई कार्रवाई किए वहां से चले गए। ऐसी बात नहीं है कि ऐसा केवल एक प्रदेश में ही हो रहा है, बल्कि देश का बहुत बड़ा भाग इस समस्या की चपेट में है। इस छोटे से उदाहरण में संदेश बहुत गहरा है।

इस बात को दावे के साथ कोई भी नहीं कह सकता कि दोनों का चयन योग्यता के आधार पर ही किया गया होगा। हमारे देश की यह बहुत बड़ी विसंगति ही कही जाएगी कि शिक्षा के मंदिरों में देश के भविष्य का निर्माण करने वाले शिक्षक आज अपने ही देश के साथ खिलवाड़ करते हुए दिखाई दे रहे हैं। अन्य पदों के लिए भी कमोवेश यही हाल है। इसमें कुछ अपवाद हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश से साक्षात्कार की प्रक्रिया को समाप्त करके जो प्रयास किया है उससे देश का युवा वर्ग बहुत प्रसन्न है। देश की आशा का केन्द्र बन चुके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से युवा यही चाहता है कि देश में योग्यता का सही तरीके से आकलन करके उसको अवसर मिले, जिससे देश में सबका साथ सबका विकास वाली भावना को काफी बल मिलेगा। भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के सरकार द्वारा चलाए जाने वाला यह प्रयास भले ही प्रथम प्रयास हो, लेकिन इस सत्य से परहेज नहीं किया जा सकता कि यह सामूहिक प्रयासों के द्वारा ही सम्पन्न हो सकता है। कोई भी प्रयास केवल सरकारी माध्यमों के द्वारा पूर्ण नहीं हो सकता, इसके लिए जनभावनाओं की भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक होती है। किसी भी नियम के क्रियान्वयन के लिए 125 करोड़ देशवासियों के सहयोग की आवश्यकता है। यह देश का सौभाग्य है कि देश में एक अच्छी सोच वाली सरकार सकारात्मक दिशा में काम कर रही है। हम भी सरकार के अच्छे कामों का भरपूर समर्थन करें। यही समय की मांग है।