कवि हृदय ने प्रस्तुत किया 'दीये और कवि का संवाद'

  • 2016-07-17 10:30:34.0
  • उगता भारत ब्यूरो
कवि हृदय ने प्रस्तुत किया

नई दिल्ली। 'उगता भारत' समाचार पत्र के मुख्य संरक्षक और 'बिखरे मोती' नामक 'अध्यात्म लेख' श्रंखला के माध्यम से अपने पाठकों के हृदय में उतर गये प्रो. विजेन्द्रसिंह आर्य ने इस पत्र के सातवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए अपनी पद्यात्मक शैली में ही लोगों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने पत्र के भविष्य के लिए लोगों से अपील की कि :-

'उगता भारत' परिवार का हे ईश सदा संवद्र्घन हो

यहां विद्वानों का वंदन हो, और पाठकों का अभिनंदन हो'

श्री आर्य ने पत्र के मुख्य संपादक राकेश कुमार आर्य को उनके 50वें जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए ये पंक्तियां भी पढ़ीं :-

ऐ नादान 'दीये' तेरी लौ को देखकर

फक्र भी होता है और गुमां भी होती है

'क्योंकि ये तूफान का रास्ता है, जिस पर तू रोशन हुआ है

इसपे बुलंद हौंसले वाला कोई विरला ही बच पाता है।'

श्री आर्य ने बड़े भावुक अंदाज में मुख्य संपादक को एक दीये की संज्ञा देकर उपरोक्त बात कही-वहीं उन्होंने अपनी ही शैली में अपने

'दीये' से ये उत्तर पाकर सभी की खूब तालियंा बटोरीं :-

''मेरा जन्म तूफानों में हुआ है

बचपन से उनसे लड़ता रहा हूं

एक तड़प है मादरे वतन के लिए

जिसकी वजह से आगे बढ़ता रहा हूं

कोई अदृश्य शक्ति है ऐसी जो मुझे आगे बढऩे को कहती है

उसी का हाथ है सिर पर वही मेरी रक्षा भी करती है।''

श्री आर्य ने सभी उपस्थित महानुभावों का वाचिक सत्कार किया और देश में भाईचारे, मानवतावाद और प्रेम की ऐसी गंगा बहाने की अपील की जिससे कि भारत पुन: विश्वगुरू बन सके और हमारी वैदिक संस्कृति का डिण्डिम घोष विश्व स्तर पर हो सके। श्री आर्य ने प्रधान संपादक की विमोचित पुस्तकों के संबंध में अपने आशीष वचन प्रस्तुत करते हुए कहा-

''उद्घाटित करे सत्य को, लेखनी सदा यशस्वी हो,

मां सरस्वती की कृपा हो, और वाणी भी ओजस्वी हो''

हृदय से सरल और भावुक कवि हृदयी श्री आर्य ने अपना उक्त वक्तव्य 'दीये और कवि का संवाद' नाम से सुनाकर उपस्थित लोगों की भरपूर तालियां बटोरीं।