'डायमण्ड पॉकेट बुक्स' के प्रतिष्ठाता श्री नरेन्द्र वर्मा बोले- पुस्तकें आपकी आंखें खोल देंगी

  • 2016-07-17 11:00:38.0
  • अमन आर्य

डायमंड बुक्स ने श्री राकेश कुमार आर्य जी के संपर्क में आने के बाद से उनकी कर्मठता, राष्ट्रवाद और भारत के इतिहास को एक प्रबुद्घ इतिहासकार के नजरिये से देखा है। मैं उनकी लेखनी को प्रणाम करता हूं। विशेष रूप से ब्रिटिश लेखकों ने हमारे इतिहास में सच्ची और राष्ट्रवाद की घटनाओं को प्रस्तुत नहीं किया बल्कि मुगल शासकों और आक्रांताओं के वर्षों में राष्ट्रप्रेम के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले वीर नायकों की जानबूझकर अवहेलना की गयी है। जिन महान योद्घाओं की मिसालें दी जानी चाहिए थीं, जिन्हें हमारा नायक होना चाहिए था, उन राष्ट्र नायकों के जीवनवृत को विकृत करके प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने अपने इतिहास लेखन में पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी जैसे महान योद्घाओं की नकारात्मक छवि प्रस्तुत की है।
देश की आजादी के इतने वर्षो बाद भी राष्ट्रीय नायकों का सच्चा इतिहास नहीं लिखा गया। भारत के इतिहास को राष्ट्रीयता और देश प्रेम के जज्बे को लिखना इतिहासकारों का कार्य है। राकेश कुमार आर्य जी इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं, वह वन्दनीय है। उन्होंने राष्ट्रभक्त और हमारे देशभक्त योद्घाओं की जीवनी का गहन अध्ययन के बाद वर्णन किया है। मैं उन्हें बधाई देता हूं और आप सबसे निवेदन है कि इन पुस्तकों को अवश्य पढ़ें। कठिन परिश्रम से तैयार पुस्तक आपकी आंखें खोल देंगी। अभी इसके तीन भाग प्रकाशित हुए हैं।
शेष तीन भाग और आने बाकी हैं। पूरी पुस्तक लगभग 2400 पृष्ठों की होगी।

अब बात करते हैं- बुलंद भारत :  'मोदी जी की नीतियां' नामक पुस्तक की। हमारे प्रधान मंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने दो वर्षों में देश का शासन चलाने के लिए जिन नीतियों का पालन किया है, उसका उल्लेख इसमें किया गया है। मोदी जी के राष्ट्रप्रेम और उनका स्वर्णिम भारत का जो सपना है उसके प्रति भी राकेश कुमार आर्य जी की गहरी निष्ठा है उन्होंने 125 करोड़  भारतवासियों के हृदय सम्राट प्रधनमंत्री के कार्यों के 2 साल का लेखा जोखा प्रस्तुत किया है। हमें लगता है कि इस तरह का यह अनोखा प्रयास है। प्रधानमंत्री के दो साल का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने वाली यह पहली पुस्तक है। राष्ट्र निर्माण में सभी भागीदार होंगे तो भारत का नवनिर्माण होगा, इसमें कोई शक नहीं।

उस स्थिति में हर भारतवासी सुखी और प्रसन्न होगा। आप सभी महानुभाव इस समारोह में यहां आये और हमारा मान बढ़ाया, इसके लिए मैं आप सभी का आभार प्रकट करता हूं।