महंगी पड़ेगी नि:शुल्क 4जी की लत

  • 2016-10-04 11:00:26.0
  • उगता भारत ब्यूरो
महंगी पड़ेगी नि:शुल्क 4जी की लत

कर्म सिंह ठाकुर
आज का युवा स्मार्ट फोन पर इतना निर्भर हो गया है कि वह शैक्षणिक संस्थानों, खेल के मैदान, सफर, खाने की मेज पर बैठने के दौरान भी फोन पर नजरें गड़ाए रखता है। नेट न चलने पर बेचैनी व बौखलाहट हो जाती है। 4जी से पहले यह पागलपन कम था, लेकिन आज तो यह पागलपन सिर चढक़र बोल रहा है।

पांच सितंबर, 2016 को रिलायंस कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने मुंबई से जियो 4-जी इंटरनेट सर्विस लांच की थी। इस सर्विस से दूरसंचार के क्षेत्र में नवीन क्रांति का आगाज हुआ। देश की टेलीफोन सेक्टर की दिग्गज कंपनियों में भी इस सर्विस ने कोहराम मचा दिया। आज के युवा के हाथ में एंड्रॉयड फोन ने ऐसी जगह बनाई है कि हर पल पर स्मार्ट फोन हावी हो गया है। उस स्मार्ट फोन में संचार का कार्य इंटरनेट करता है और 4-जी जैसी सुविधा नि:शुल्क मिल जाने से हर स्मार्ट फोन उपयोगकर्ता गदगद है। 4-जी सिम को प्राप्त करने के लिए देश व प्रदेश में लंबी कतारें देखी जा रही हैं। ऐसा उत्साह व रोमांच पैदा हुआ है मानो हर कोई इस विशेष नि:शुल्क ऑफर को प्राप्त करना चाहता है, जिसकी वैधता 31 दिसंबर, 2016 को स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। 4-जी सेवा में महज कुछ सेकंड में ही वीडियो कॉलिंग, टीवी स्ट्रीमिंग, यू-ट्यूब, 30 टीवी जैसे प्रोग्राम आसानी से देखे जा सकते हैं। सर्वप्रथम हमें 'जी' का मतलब समझना होगा। 'जी' का मतलब है जेनरेशन। यह आपके स्मार्टफोन में कौन से लेवल का नेटवर्क है, उसे दर्शाता है। आपने 1जी के बारे में नहीं सुना होगा। आपको बता दूं 1जी सिग्नल एनालॉग थे। यह पहला सैलुलर नेटवर्क सिस्टम था। इसके बाद 2जी पहला डिजिटल सैलुलर नेटवर्क था। 2जी को ही हम जीएसएम, सीडीएमए बोलते हैं, उसके बाद 3जी की बारी आती है अर्थात 3जी को हम मोबाइल ब्रॉडबैंड भी कहते हैं। उसकी स्पीड की ब्रॉडबैंड की तरह अच्छी थी। अब सितंबर, 2016 में बारी आई 4-जी तकनीकी की, जिसका हंगामा इतना हुआ कि लांचिंग के दिन ही लाखों ग्राहक मिल गए तथा प्रतिस्पर्धात्मक कंपनियों को भी करोड़ों का चूना महज 24 घंटों में ही लग गया। 4जी तकनीकी भारत में बहुत तेजी से फैल रही है। आपको यह ज्ञात हो गया होगा कि 1जी, 2जी, 3जी, 4जी के बाद भविष्य में 5जी भी आने वाला है। हवेई तथा वोडाफोन जैसी दिग्गज कंपनियों ने इस तकनीक को टेस्ट करना भी शुरू कर दिया है।

यह तकनीक 2020 तक आम जनता को मिल जाएगी। हर बार जनरेशन के चक्र में आपको अपने फोन भी बदलने होंगे। जैसे 4जी के आगमन से करोड़ों 3जी फोन ई-कचरे में परिवर्तित हो गए हैं। अब यह समझना जरूरी है कि रिलायंस जियो दिसंबर, 2016 तक 4जी तकनीक नि:शुल्क क्यों दे रही है। सर्वप्रथम फ्री के ऑफर से रिलायंस को चंद दिनों में ही करोड़ों ग्राहक मिल गए, ग्राहक लंबी कतारों में खड़े होकर सिम खरीद रहे हैं। हर रोज तीन से पांच लाख नए ग्राहक बन रहे हैं, जिससे कंपनी के पास दिसंबर, 2016 तक उपभोक्ताओं का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा हो जाएगा तथा ग्राहकों को 4जी स्पीड की आदत भी बन जाएगी। यही आदत रिलायंस को करोड़ों रुपए का भारी-भरकम मुनाफा दिलाएगी। आपको याद होगा प्रारंभ में इंटरनेट डाटा बहुत ही सस्ता था। जैसे-जैसे ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई, कंपनियों ने डाटा पैक में भी बढ़ोतरी करनी शुरू कर दी थी। पहले हमें 99 में 1जीबी, 30 दिनों में मिलता था, लेकिन अब वही 1जीबी 147 रुपए में 28 दिनों तक सीमित हो गया है।
कंपनी के पेशेवर कर्मचारी बाजार का गहरा अध्ययन करने के उपरांत ही अपनी योजनाएं लांच करते हैं। कुछ इसी तरह की सोची-समझी व्यावसायिक रणनीति का परिणाम जियो 4-जी है, जो आपको कुछ महीनों के लिए नि:शुल्क में उपलब्ध है। आने वाले दिनों में यह तकनीक हमारी जेबों पर भारी पडऩे वाली है। अर्थशास्त्र का एक नियम है कि फ्री में कुछ नहीं मिलता। बिजनेस की हर चाल व युक्ति पूर्व निर्धारित होती है। प्रारंभ में जियो 4जी ने लाइफ कंपनी के साथ टाई-अप करके 4जी सेट उपलब्ध करवाए, ताकि तकनीक की आड़ पर मुनाफा कमाया जा सके। जब ज्यादा सफलता नहीं मिली, तब ग्राहक को आकर्षित करने के लिए एक ऐसी युक्ति लेकर आए, जिसने पूरे देश में त्राहि-त्राहि मचा दी है। आज का युवा स्मार्ट फोन पर इतना निर्भर हो गया है कि वह शैक्षणिक संस्थानों, खेल के मैदान, सफर, खाने की मेज पर बैठने के दौरान भी फोन पर नजरें गड़ाए रखता है। नेट न चलने पर बेचैनी व बौखलाहट हो जाती है। व्यवहार में चिड़चिड़ापन, आंखों की नजर का कम होना, स्र्वाइकल प्रॉब्लम जैसी समस्याएं युवाओं में आम बात हो गई है। 4जी से पहले यह पागलपन कम था, लेकिन आज तो यह पागलपन सिर चढक़र बोल रहा है। इसका खामियाजा देश का युवा पथभ्रष्ट होकर भुगत रहा है। कंपनियां व्यवसाय कर रही हैं। 

सोची-समझी रणनीति के तहत अपने कृत्य कर रही हैं। देश का युवा अपने बहुमूल्य समय को फेसबुक, व्हाट्सऐप आदि पर व्यतीत कर रहा है। जब से यह प्रथा नि:शुल्क शुरू है, तब से तो हाल-बेहाल है। देखना दिलचस्प होगा कि  दिसंबर, 2016 के बाद यही युवा चोरी-डकैती करेगा, अपने शौक पूरे करेगा। इतिहास इसका गवाह भी है। युवा वर्ग को इस नि:शुल्क ऑफरों से बचना होगा तथा अपनी आदत और दिनचर्या में केवल फ्री समय में सीमित वक्त के लिए ही इस तरह की सेवाओं का भोगी बनना होगा अन्यथा भविष्य अंधकार के काल में समा जाएगा।

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