शांत और गंभीर प्रकृत्ति के हैं अपने राज्यपाल रामनाईक

  • 2016-11-13 09:30:06.0
  • श्रीनिवास आर्य
शांत और गंभीर प्रकृत्ति के हैं अपने राज्यपाल रामनाईक

भारत में राज्यपालों की भूमिका को लेकर कई बार प्रश्न उठे हैं, इसकी वजह यह भी रही है कि राज्यपालों ने कई बार अपने पद की गरिमा के अनुकूल कार्य न करके केन्द्र के इशारे पर गुड़-गोबर करने का अनुचित और असंवैधानिक कार्य कर दिखाया।

उत्तर प्रदेश में इस समय सपा की सरकार है, जबकि राज्यपाल रामनाईक भाजपा की पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खान की ओर से कई बार ऐसे गलत बयान दिये गये हैं जिनसे राज्यपाल के सम्मान को ठेस पहुंचती है। या जिन्हें संवैधानिक भाषा में कभी भी उचित नही कहा जा सकता। परंतु राज्यपाल श्री रामनाईक ने अपनी ओर से जिस गंभीरता और शालीनता का परिचय दिया उससे राजभवन की मर्यादाओं की रक्षा तो हुई ही है, साथ ही राज्यपाल स्वयं को भी एक शांत और गंभीर व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करने में सफल रहे हैं। उन्होंने सपा सरकार के साथ उचित समन्वय स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है, और यदि कहीं टकराव की बात आई भी है तो उसे बड़ी सावधानी से उन्होंने दूर करने का सफल प्रयास किया है, जिससे उनकी गंभीरता और शालीनता दोनों का पता चलता है। वैसे हमारे संविधान में राज्यपाल का प्रावधान भी इसीलिए रखा गया है कि वह किसी भी परिस्थिति में केन्द्र और राज्य को दूर न होने दे, और एक ऐसी कड़ी बन जाए जिससे केन्द्र और राज्य परस्पर मिलकर जनकल्याण के कार्यों में लगे रहें और किसी प्रकार की घिनौनी राजनीति के फेर में न पड़ें। यद्यपि स्वतंत्रता के बाद अधिकांश राज्यों में केन्द्र की तरह कांग्रेस की ही सरकारें थीं, परंतु बाद में राज्यों में अलग पार्टियों की सरकारें बननी आरंभ हुईं, तो वहीं से राज्यपाल की गंभीर भूमिका की शुरूआत भी हो गयी। इंदिरा गांधी ने अपने समय में राज्यपाल के पद का दुरूपयोग कराया और उसे अपनी कठपुतली बनाकर रखा, जिससे कई प्रदेशों में चुनी हुई सरकारों को गिराने में वह सफल रहीं। 

यह अच्छी बात है कि मोदी  सरकार इंदिरा गांधी की गल्तियों को दोहराना नही चाहती। वैसे राज्यपाल श्री रामनाईक की राजनैतिक पृष्ठभूमि एक गंभीर राजनीतिज्ञ की रही है, उत्तर प्रदेश में आकर उन्होंने अपनी अच्छी छवि को और भी बेहतर बनाने का कार्य किया है।