पशुबलि क्यों

  • 2016-09-13 05:15:16.0
  • उगता भारत ब्यूरो
पशुबलि क्यों

क्या वास्तव में मुस्लिमों के अल्लाह और हिन्दुओं की देवियां बलि मांगते है ? यह एक बड़ा सवाल है ,जो लोग ये सब करते है वे तो हमेशा इनका समर्थन ही करेंगे चाहे ये गलत ही क्यों न हो? लेकिन मेरा यह मानना है कि अगर अल्लाह या देवी - देवता इतना क्रूर या निर्दयी है तो फिर जब हम दु:खी होते है तब इनको क्यों याद करते है , क्यों मन्दिर ,मस्जिद और चर्च में जाकर माथा टेकते है ? लेकिन पुराने समय से चली आ रही बलि-प्रथा आज भी उसी अंदाज से चल रही ,बल्कि आज और ज्यादा संख्या में पशुओं को काटा जा रहा है ।

     ऐसा नहीं है कि पशुओं को मुस्लिम ही काटते है अपने अल्लाह की याद में बल्कि हिन्दू भी कम नहीं है जैसा कि दुर्गाष्टमी पर राजस्थान में राजपूत समाज के लोग अपनी ईष्ट देवी को बकरे की बलि देते है ,उनका मानना है कि देवी बलि मांगती है और हमें देनी पड़ती है लेकिन मुस्लिमों की भांति इतना रक्तपात नहीं करते है । ऐसा ही नेपाल में गढिमाई माता के नाम पर अनगिनत भैंसों को मारा जाता है । मुस्लिम समाज के लोग हर साल अपने पवित्र त्योहार ईद-उल-अज़हा (बकरीद) पर अनगिनत संख्या में बड़े से बड़े पशुओं की बलि देते है जिनका आज हम अनुमान ही नहीं लगा सकते । मुस्लिमों के इस त्योहार पर गली - मौहल्लों में खून की नदियां बहने लगती है, क्या यह सही है ? लोग ईद से पूर्व इस तैयारी में जुट जाते है कि कौन कितना बड़ा पशु कुर्बान करेगा ? अर्थात एक हौड़ शुरू हो जाती है । इन पशुओं को काटने पर चाहे कोई फायदा हो या न हो पर इनको काटा तो अवश्य जाता है ।

     कुछ मुस्लिम लोगों से ईद के बारे में पूछा कि आखिरकार इतने पशुओं को क्यों मारा जाता है , और क्यों ऐसा नहीं करते जैसा हजरत इब्राहिम ने अपने पुत्र हजरत इस्माइल को कुर्बान करने को तैयार हो गए थे आप लोग भी अपने पशु की बजाय अपने पुत्र को क्यों नहीं कुर्बान करते ? लोगों का जवाब मिला कि अपने पुत्र की बलि कैसे दे सकते हैं और अगर पशु की बलि नहीं देते है तो अल्लाह नाराज हो जाता है । लोग यहीं पर नहीं रुकते ,अर्थात इन कुकर्मों के फ़ोटो खींचकर सोशल मीडिया पर भी वायरल करते है । आज न तो सरकार इस ओर ध्यान देती और न ही खुद लोग । आज इस टिप्पणी पर शायद मुस्लिम लोग ख़ासे नाराज भी होंगे और पता नहीं कितने अभद्र कमेंट करेंगे ? 
राजू सुथार