भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने में कोई ऐतराज नही

  • 2016-08-19 06:30:25.0
  • श्रीनिवास आर्य
भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने में कोई ऐतराज नही

श्री हाजी मौहम्मद इरशाद मूल रूप में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर  के रहने वाले हैं जो कि वर्तमान में जहांगीरपुरी दिल्ली में रहते हैं। इन्होंने 'आलिम' कोर्स किया है। श्री इरशाद दस-बारह वर्ष अरब में रहे हैं जिन्हें फारसी, उर्दू  और अरबी का अच्छा ज्ञान है। वह मानवतावादी हैं और उनकी मानवता में पहले किसी मजहब के बारे में नही सोचा जाता, बल्कि वह विश्व मानस की वैदिक संस्कृति के उपासक हैं।

पिछले दिनों हमारी श्री इरशाद से एक विशेष बैठक संपन्न हुई। जिसमें उनके बारे में जानकर हमें विशेष प्रसन्न्ता हुई, जिसे हम अपने पाठकों के साथ भी शेयर करना चाहेंगे। श्री इरशाद का कहना है कि भारत में मोदी सरकार 'सबका साथ और सबका विकास' के जिस एजेंडा पर कार्य कर रही है वह बहुत ही महत्वपूर्ण है और किसी भी देश के शासक या सरकार को ऐसी ही नीति पर कार्य भी करना चाहिए। वह नही चाहते कि देश में 'शाहबानो' के लिए अलग और सुमित्रा के लिए अलग कानून हो

, अपितु वह समान नागरिक संहिता के समर्थक हैं। वह कहते हैं कि प्रत्येक मुसलमान को अपनी मजहबी स्वतंत्रता होनी चाहिए, परंतु देश की पवित्र भूमि को पुण्यभूमि और पितृभूमि मानने के लिए उसे सदा प्राथमिकता देनी चाहिए। वह कहते हैं कि भारत के पूर्वज हमारे पूर्वज हैं, इसकी संस्कृति की पवित्रता के कारण ही मुसलमान सब देशों से अधिक सुरक्षित और समृद्घ इस देश में हैं। श्री इरशाद का कहना है कि वह जाकिर नाइक की गतिविधियों से सहमत नही हैं। श्री नाइक या कोई भी व्यक्ति देश में या समाज में आग लगाने की बात करता है तो वह इस्लाम का शत्रु है। जो लोग जाकिर नाइक की बातों में आकर कुछ उत्साह दिखा रहे हैं उन्हें भी अपने भविष्य के विषय में सोचना चाहिए कि यदि ऐसे लोगों को बढ़ावा दिया गया तो उनका अपना भविष्य भी चौपट हो जाएगा।

श्री इरशाद कहते हैं कि भारत को दारूल हरब बनाकर यहां आतंकवाद परोसने या इस देश में कत्लोगारत की बात करना बहुत ही बेशर्मी की बात है। इस्लाम की लड़ाई हिंदुत्व से नही है। बल्कि समाज के जालिम लोगों से होती है जिस पर हिंदू समाज भी अपनी सहमति देता है। इसलिए समाज के जालिम लोगों के खिलाफ दोनों समुदायों को एक साथ आना चाहिए। श्री इरशाद कहते हैं कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने से इस्लाम को कोई खतरा नही है, क्योंकि हिंदुत्व किसी मजहब को खत्म करने या खाने की इजाजत नही देता, बल्कि यह उसका पोषण करता है। ऐसे विनम्र हिंदुत्व से इस्लाम को कोई खतरा नही है।

श्री इरशाद का कहना है कि गौरक्षा समय की आवश्यकता है जो लोग इस पशु को किसी संप्रदाय विशेष का मानकर चलते हैं वह भारी भूल कर रहे हैं। इसके विनाश में हम सबका विनाश निश्चित है। उनका मानना है कि बकरीद का अभिप्राय गाय की पूजा है और मुसलमान जहां हज के लिए जाते हैं वहां आज भी संगेअस्वद की पूजा की जाती है, जो दोनों मजहबों को एक साथ लाने में कामयाब हो सकती है।