किसान आन्दोलन एवं कानून व्यवस्था राजनीति की हो चुकी है शिकार-राजेन्द्र सिंह तोमर

  • 2016-10-09 12:15:51.0
  • उगता भारत ब्यूरो
किसान आन्दोलन एवं कानून व्यवस्था राजनीति की हो चुकी है शिकार-राजेन्द्र सिंह तोमर

'उगता भारत' के बड़ौत ब्यूरो चीफ चंद्रबल तोमर व प्रतिनिधि सुनील कुमार चौहान की 'भारतीय किसान यूनियन' के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य राजेन्द्र सिंह तोमर के साथ विशेष बातचीत:-
किसान नेता भारतीय किसान यूनियन के उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह तोमर ने 'उगता भारत' के साथ विशेष बातचीत में   अपने आवास कासिमपुर खेड़ी गाँव में कहा कि आज किसान इतना दु:खी है कि इतना कभी नहीं हुआ। चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत ने किसानों के लिये भारतीय किसान यूनियन संगठन बनाया और किसानों को उनकी पहचान के साथ उनकी ताकत बढ़ायी। उन्होंने कहा कि महेन्द्र सिंह टिकैत की एक आवाज पर भारत का किसान एक होकर अपने हक लेने के लिये सडक़ों पर आता रहा। वर्ष 1987 से किसान आन्दोलन शुरू हुए। मुजफ्फ रनगर के भोपा गंगनहर पुल पर नईमा काँड के आन्दोलन में चौधरी साहब के साथ पूरा किसान एकजुट हुआ। प्रदेश सरकार ने किसान आन्दोलन मजबूत होता देख इसे बिखेरने का काम किया। किसानों के ट्रैक्टर गंगनहर में गिरवा दिये थे। लेकिन किसान टस से मस नहीं हुआ और अंत में सरकार झुकी, न्याय मिला और किसानों को नये ट्रैक्टर मिले थे। वहीं मेरठ कमिश्नरी पर बढ़े विद्युत बिलों के विरोध में स्व0 श्री महेन्द्र सिंह टिकैत की अगुवाई में 25 दिन आन्दोलन धरना प्रर्दशन हुआ। उस समय सरकार ने चार वर्ष का बढ़ा विद्युत बिल वापस लिया था। इसके बाद फि र 32 महीने आज किसानों के नाम पर किसान आन्दोलन और कानून व्यवस्था राजनीति का शिकार हो गया। कुछ किसान संगठन के नाम पर दलबदल में ठगी दल बन गये और किसानों को नशे में धकेल कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं?
चौ0 महेन्द्र सिंह टिकैत के स्वर्गवास के बाद उनकी  किसानों की अधूरी लड़ाई को अंजाम देने के लिये उनके पुत्र को जिम्मेदारी दी गयी। लेकिन उनके बाद भारतीय किसान यूनियन उस स्तर से आगे नहीं बढ़ा, इसमें कुछ लोगों ने अलग संगठन बनाया और स्वार्थ सिद्ध करने लगे। वहीं किसानों में भी बदलाव आया है? 

किसान नेता राजेन्द्र सिह तोमर मूल रूप से कासिमपुर खेड़ी गाँव के निवासी है। उनके पिता स्व0 श्री मोहन सिंह भी बहुत ही सादे व्यवहार के किसान रहे। वह एक किसान के साथ-साथ वह भट्टा व्यापारी भी हैं। 

वह अपने परिवार में सबसे छोटे हैं। लेकिन शुरू से ही वह जब अपने पिता के साथ खेतों में कार्य करते थे बड़ी मेहनत से करते थे और जब वह फ सल बाजार में बिकती थी यानि गन्ना, वह हिसाब लगाते थे कि गन्ना फ सल एक वर्ष तक सींचने के बाद मानक के अनुरूप मेहनत भी नहीं मिलती। 

'उगता भारत' के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वास्तव में, मैं जब किसानों व मजदूरों के बारे में सोचता हूँ तो आँखों से पानी निकलता है। उन्होंने कहा कि आज सभी पार्टियाँ किसानों और युवाओं को अपना मोहरा बनाकर अपना स्वाथ्र सिद्ध कर रही है। उन्हें नशे में धकेल रही है।

चुनाव आते ही गाँव-गाँव में अपने एजेन्ट बनाकर शराब बाँटी जाती है। प्रशासन व पुलिस पर भी उन्होंने प्रश्न चिन्ह लगाये।

उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक व उपजिलाधिकारी, तहसीदार अपने कार्यालयों में बैठकर अपने मातहतों द्वारा कराई गयी जाँच को वहीं से सही मानकर शासन को भेजकर कत्र्तव्य की इति श्री कर लेते हैं। अधिकारी धरातल पर पहुँचकर यह नहीं देखते कि यह जाँच सही है या गलत है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन ही किसानों का संगठन है? किसान खेतों में फ सलों को पैदाकर खुद भी खाता है और देश को भी खिलाता है। 

उन्होंने कहा कि जब षडय़ंत्रकारियों के पापों का घड़ा भर जायेगा तो वह फू टकर जब जहर निकलेगा तो अंधकार में फं से किसान स्वत: ही बाहर जा जायेंगे। उन्होंने आगे कहा कि बकाया गन्ना भुगतान के लिये जब किसान स्वयं जागरूक होकर सडक़ों पर उतरेगा तो वह बकाया गन्ना भुगतान ही लेकर रहेगा।  राजनीति किसानों को एकजुट होने नहीं देती है। क्योंकि उनके स्वार्थ सिद्ध नहीं हो पायेंगे।  

उन्होंने आगे कहा कि कुछ राजनीतिक लोग गऊमाता पर राजनीति करते हैं तो कुछ विकास और शिक्षा की बातें करते हैं। मैं उनसे पूछता हूँ आज के युवाओं के लिये रोजगार कहाँ है? शिक्षा का स्तर गिर गया। कानून व्यवस्था नहीं है। अत: जनता को बदमाश खुलेआम मार रहे है, और बदमाशों द्वारा खुलेआम लूट, हत्या, अपहरण आदि घटनाएँ कर रहे हैं। क्या यह राजनीति है? पूर्व समय में देखो जब हिन्दु-मुस्लिम एक साथ मिलकर काम करते थे और आज नेता एक दूसरे को लड़ाकर स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं।

किसान नेता श्री तोमर ने 'उगता भारत' के साथ खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि लोकसभा के चुनाव से पूर्व राजनीतिज्ञों ने खेल खेला वह निदंनीय है। उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने भाजपा पर जमकर प्रहार किये और कहा कि सरकार मनरेगा पर हजारों रूपये एडवरटाईजमेन्ट पर खर्च करती है। लेकिन मनरेगा में रोजगार सिर्फ कागजों तक ही मिलते हैं। 
मजदूरों को पहले रोजगार थे- नहरों व माइनरों की सफाई हो या तालाबों की सफ ाई या अन्य कार्य मानक के अनुरूप होते थे। अब सिर्फ रोजगार के नाम पर मजदूरों को जॉबकार्ड भी एक पहेली बन गया है।

उन्होंने कहा कि अगर मुझे मनरेगा योजना चलाने की जिम्मेदारी मिले तो प्रदेश में चमत्कार करा दूँगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नहरों और माईनरों की पट्टियाँ आज सूनापन रहती हैं। अगर इन पट्टियों को सही कराकर सौन्दर्यीकरण कराया जाये तो यह पार्क भी बनकर महकेगा और युवाओं के लिए दौडऩे का उचित स्थान भी बनेगा। आज युवा सडक़ों पर दौड लगाते हैं और दुर्घटनाएँ होती है। उन्होंने किसान नेता सरदार बी0एम0सिंह की सराहना की, कि वह किसानों के हक की लड़ाई नि:स्वार्थ माननीय उच्च न्यायालयोंं में लड़ रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि कोई चाय बेचने वाला महंगी-महंगी पोशाक नहीं बदलता, चाय बेचने वाले को तो सादगी दिखानी चाहिए थी। उनका यह इशारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर था। उन्होंने बी0जे0पी0 विधायक संगीत सोम और सुरेश राणा की निष्ठा पर भी प्रश्नचिन्ह लगाये। 

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यख राजेन्द्र सिंह तोमर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सबसे अच्छे प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह जी रहे जो साफ-सुथरी छवि के हैं। उनके दामनपर कभी दाग नहीं रहा। यह देश महात्मा गाँधी जी का रहा है। जो अहिंसा के बल पर देश को आजाद कराया। 

पहले भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश् एक थे। आजादी के बाद बँटवारे हुए। आज बी0जे0पी0 हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति कर जनता को षडय़ंत्रकारी राजनीति में फं सा रही है। आज जो भारत-पाकिस्तान सीमा पर हो रहा है वह एक सोची समझी साजिश है।