टूटती आश : लावारिस बन गया है प्रदेश का खेल ढांचा

  • 2016-08-29 08:00:06.0
  • उगता भारत ब्यूरो
टूटती आश : लावारिस बन गया है प्रदेश का खेल ढांचा

भूपिंदर सिंह

दुख होता है देखकर कि करोड़ों रुपए से बनी ये अंतरराष्ट्रीय प्ले फील्ड बदहाली में लावारिस पड़ी आंसू बहा रही हैं। प्रदेश में प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग बंद पड़ा है, एक दो प्रशिक्षकों को छोड़ दें, तो शेष प्रतिवर्ष लाखों रुपए का वेतन यूं ही डकार रहे हैं

विश्व स्तर पर भारतीय खिलाडिय़ों का पिछडऩा जहां कोई नई बात नहीं है, उसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचली खिलाडिय़ों का हाल है। कुछ चुनिंदा निजी प्रयासों के कारण कभी कभार हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर  मेडल  टैली में नजर आता है, मगर राज्य में खेल प्रबंधन का बहुत बुरा हाल है। हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के पास इस समय बहुत सी खेलों के लिए विश्व स्तरीय प्ले फील्ड बनकर तैयार हैं, मगर वे लावारिस पड़ी हैं। इस कॉलम के माध्यम से इस बारे में कई बार लिखा जा चुका है कि राज्य में करोड़ों रुपए से निर्मित इन विश्व स्तरीय खेल सुविधाओं की कोई तो सुध  ले

, मगर खेल विभाग के कान पर आज तक जूं नहीं रेंग पाई है। ऊना में हाकी के लिए एस्ट्रो टर्फ 2012 में बिछ चुका है, मगर वहां पर आज तक कोई भी हाकी प्रशिक्षक इन चार सालों में नियुक्त नहीं हो पाया है। क्या यह टर्फ देखने के लिए बिछाई गई है? धर्मशाला तथा हमीरपुर में सिथेंटिक ट्रैक भी 2012 में ही बिछ चुके हैं, मगर यहां पर भी खेल विभाग अपना कोई भी प्रशिक्षक नहीं भेज पाया है।

धर्मशाला में खेल विभाग का कार्यालय नजदीक होने के कारण वहां पर तो थोड़ा-बहुत बाहरी लोगों का अंदर घूमना बंद है, मगर हमीरपुर में ट्रैक पर सवेरे-शाम दर्जनों लोगों को परिवार सहित पार्क की तरह सैर करते देखा जा सकता है। लोग मजे से ट्रैक पर बैठकर जल-पान करते हैं। खेल विभाग का यहां पर तो चौकीदार भी नहीं है। आजकल बरसात में आवारा पशु भी ट्रैक पर आकर गोबर करके अपनी हाजिरी दर्शा रहे हैं। खेल विभाग अपने प्रशिक्षकों को वहां तैनात किए हुए है, जहां पर 400 मीटर का घास का मैदान तक नहीं है। क्या कारण रहे कि पिछले चार वर्षों में इन विश्व स्तरीय प्ले फील्ड में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने वाला खेल विभाग को नहीं मिला। खेल विभाग के कितने प्रशिक्षक प्रतिदिन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हुए हैं, क्या इस बात का निरीक्षण खेल विभाग ने कभी किया है। खेल विभाग प्रशिक्षण के नाम पर पायका खेलों के लिए लगने वाले आठ-दस दिन के प्रशिक्षण से अपने को जोडक़र अपना काम पूरा समझ रहा है। हिमाचल में क्यों प्रशिक्षक लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं चला रहे हैं या कौन उन्हें अपने काम करने से दूर कर रहा है, क्या इस विषय पर राज्य खेल विभाग ने कभी विचार किया है? जब प्रशिक्षण कार्यक्रम ही नहीं होगा तो फिर अच्छी प्ले फील्ड किस काम की है। यह भी सबसे अहम कारण है कि करोड़ों रुपए से बनी ये अंतरराष्ट्रीय प्ले फील्ड बदहाली में लावारिस पड़ी आंसू बहा रही हैं। प्रदेश में प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग बंद पड़ा है, एक दो प्रशिक्षकों को छोड़ दें, तो शेष प्रतिवर्ष लाखों रुपए का वेतन यूं ही डकार रहे हैं। यही कारण है कि  प्रशिक्षक के पद को डाईंग कैडर कर दिया था, मगर राज्य में कुछ प्रशिक्षकों ने निजी प्रयासों के बूते राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल के लिए पदक दिलाए तो तत्कालीन सरकार ने बीस वर्ष बाद देश में जहां प्रशिक्षक पर डाईंग या हिमाचल में प्रशिक्षक नियुक्त किए थे। अगर राज्य में प्रशिक्षकों का ऐसे ही गैर जिम्मेदाराना रवैया रहा तो फिर भविष्य में प्रशिक्षक नियुक्ति के बारे में सरकार सौ बार सोचेगी। खेल विभाग के पास लगभग हर जिला में इंडोर स्टेडियम या हाल मौजूद है। इस तरह की संपत्ति तैयार करने के लिए सरकार को भारी भरकम रकम खर्च करनी पड़ती है। इस तरह की संपत्तियों का यदि व्यवस्थित व समुचित उपयोग होता, तो निश्चित तौर पर प्रदेश की कई प्रतिभाएं खुद को राज्य या राष्ट्रीय स्तर की खेलों के लिए तैयार कर सकती थीं। मगर हैरानी होती है देखकर कि इन स्टेडियमों में खेल के नाम पर शाम के समय अपनी थकान मिटाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी खेलने आते हैं। राज्य में इंडोर खेलों के प्रशिक्षक क्या कर रहे हैं। इस बात को भी सभी देख रहे हैं। खेल विभाग के अधिकारियों को समय रहते समझ जाना चाहिए कि खेल प्रशिक्षण का जिम्मा उनके द्वारा नियुक्त किए गए प्रशिक्षकों का है और उनसे पूरा वर्ष प्रशिक्षण कार्य कैसे लेना है यह सब भी तय करना होगा, ताकि करोड़ों रुपए खर्च करके बनाए गए विश्व स्तरीय खेल ढांचे का सही उपयोग हो सके। हिमाचल प्रदेश खेल विभाग को यह भी ठीक ढंग से समझना होगा कि प्रदेश का जलवायु खेल प्रशिक्षण के लिए अमरीका व यूरोप से कहीं बेहतर है। पूरा वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहे और इस करोड़ों रुपए ने निर्मित खेल सुविधा का सदुपयोग खेल विभाग अपने प्रशिक्षकों से करवाकर हिमाचली खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का प्रबंधन करे।