तलाशनी होगी भारत उदय की ग्रामीण राह

  • 2016-08-25 14:00:17.0
  • उगता भारत ब्यूरो
तलाशनी होगी भारत उदय की ग्रामीण राह

केएस ठाकुर

केंद्र सरकार द्वारा भी भारत के विकास में गांवों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रयास किया जा रहा है। संभवतया यही कारण है कि इस बार संबंधित मद के बजट में 228 फीसदी बढ़ोतरी की गई है अर्थात प्रत्येक पंचायत को औसतन 80 लाख रुपए की राशि मिलेगी। यदि इसका सही इस्तेमाल भारत के ग्रामीण संसदों द्वारा किया जाता है, तो निश्चित तौर पर 2022 तक भारत पूर्ण विकसित राष्ट्रों में अपना दावा ठोंक सकता है। पंचायती राज शासन की अवरधारणा स्थानीय स्तर के शासन में लोगों की भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से गढ़ी गई थी। भारत में पंचायती राज का प्रारंभ दो अक्तूबर, 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिला से किया था। इसके उपरांत आंध्र प्रदेश में इसकी शुरुआत हुई। इस व्यवस्था को अपनाने से सत्ता का विकेंद्रीकरण ग्रामों की तरफ बढ़ा। इसके क्रियान्वयन का पूरा दारोमदार पंचायतों पर ही था

, लेकिन भारतीय शासन व्यवस्था का यह विकेंद्रीकरण भारत की भौगोलिक, सामाजिक, भाषात्मक व क्षेत्रवाद सरीखे घटकों में जटिलता के कारण पूरे देश में धरातलीय स्तर पर एकसमान रूप से नहीं हो पाया। जिस स्थानीय जनता से इसे सफल बनाने की अपेक्षा थी, उसका भी इसको लेकर उपेक्षित रवैया ही देखने को मिला है। ये कुछ कारण हैं कि असली भारत, जो गांवों में बसता है, के संचालन के लिए शुरू की गई पंचायती राज व्यवस्था को अपना अस्तित्व स्थापित करने में आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

हालांकि इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए अब तक कई स्तरों पर प्रयास किए गए हैं। इस दिशा में कई समितियां गठित की गईं, जिन्होंने इनकी कार्य पद्धति में सुधार के लिए कई अहम सुझाव दिए। इनमें से कई सुझावों को अपनाया भी गया है। वर्तमान समय में भी पंचायती राज संस्थाओं की सुदृढ़ता के लिए सरकारें सचेत दिखती हैं। ये संस्थाएं प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका का निर्वहन कर पाएं, इसके लिए विशेष आधुनिक सुविधाओं जैसे पंचायतों में कम्प्यूटरीकृत कार्यप्रणाली व इंटरनेट की सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। इस वर्ष भारतीय संविधान के प्रणेता डा. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती पर 14 अपै्रल, 2016 को उनके जन्म स्थल महू (मध्य प्रदेश) से सुधार के इन प्रयासों को आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष अंबेडकर जी की जयंती पर 'ग्राम उदय से भारत उदय' अभियान को शुरू किया गया तथा समानता स्थापित करने के लिए संपूर्ण भारत में समरसता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अभियान में सामाजिक समरसता और ग्राम किसान सभाएं आयोजित करवाई गईं।

इसी कड़ी का अंतिम पड़ाव 29 अपै्रल को संपन्न हुआ, जिसमें डा. अंबेडकर के आदर्शों पर चलकर 'ग्रामोदय से भारत उदय' के आगाज से पंचायतों को उनकी शक्तियों तथा उनके सही संचालन से भारत को समृद्ध, स्वच्छ तथा खुशहाल राष्ट्र के रूप विकसित करने के लिए पंचायतों के योगदान पर विशेष सभाओं का आयोजन किया गया। इसी मंच से एक बार फिर से वर्ष 2019 तक संपूर्ण स्वच्छ भारत, हर गांव तक सडक़ सुविधा पहुंचना तथा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने सरीखे संकल्पों को दोहराया गया। वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा भारत के विकास में गांवों की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने का प्रयास किया जा रहा है। संभवतया यही कारण है कि इस बार संबंधित मद के बजट में 228 फीसदी बढ़ोतरी की गई है अर्थात प्रत्येक पंचायत को औसतन 80 लाख रुपए की राशि मिलेगी। यदि इसका सही इस्तेमाल भारत के ग्रामीण संसदों द्वारा किया जाता है, तो निश्चित तौर पर 2022 तक भारत पूर्ण विकसित राष्ट्रों में अपना दावा ठोंक सकता है। पंचायती राज संस्थाओं में विकास की नीतियों के सही संचालन में अनेक त्रुटियां जैसे प्रतिनिधियों का शिक्षित न होना, ग्राम सभाओं में कोरम पूरा न होना, पदाधिकारियों की कछुआ चाल इत्यादि समस्याओं को सुलझाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी। यदि पंचायत की आम बैठकों में कुशल व योग्य अधिकारियों द्वारा सरकार की 'भारत उदय योजना' की सही जानकारी देकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाए, तो नवग्रामीण क्रांति का उदय जरूर होगा।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव यह दर्शाता है कि पंचायतों में उनकी भाषा में साधारण शब्दों में जनमानस को समझाया जाए तो परिणाम बहुत सकारात्मक देखने को मिलते हैं। शिक्षा नीति की समीक्षा पर मेरा यह शोध काफी सफल हुआ। मुझे ग्रामीण पंचायत में लोगों से शिक्षा नीति पर सुझाव लेने थे। जब मैंने ग्रामीणों का स्थानीय भाषा में अभिवादन किया तथा अपनापन दिखाया तो मुझे बहुत ही हैरतअंगेज परिणाम मिले। यदि हिमाचल जैसे 90 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या वाले प्रदेश की बात करूं, तो महात्मा गांधी वह वाक्य 'असली भारत गांवों में बसता है' चरितार्थ साबित होता है। आवश्यकता होगी कि समस्त भारतीय पदाधिकारी 'ग्राम उदय से भारत उदय योजना' की सफलता की सुनिश्चितता के लिए पूर्णतया ईमानदारी से कुशलतम व्यवस्थाओं का प्रबंध करके ग्रामीणवासियों का सही मार्गदर्शन करें तथा सरकार की इस राष्ट्र कल्याणकारी योजना के लिए आह्वान करें। कहना न होगा कि यही बाबा साहेब अंबेडकर को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन दलित उत्थान तथा सामाजिक समानता के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष में खपा दिया।