जल परिवहन की नई संभावनाएं

  • 2016-08-31 08:00:37.0
  • अमरनाथ सिंह
जल परिवहन की नई संभावनाएं

बीते पच्चीस सालों में जल परिवहन को विकसित करने के लिए नौ समितियां गठित की गईं। सभी समितियों ने जल मार्ग के विकास पर मुहर तो लगाई लेकिन संभावित खतरों की ओर इशारा भी किया। लेकिन जल मार्ग में आने वाली बाधाओं से किस तरह से निजात पाई जाए, इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। अब इस दिशा में नई शुरुआत की गई है। वर्तमान सरकार ने एक सौ ग्यारह नदियों को राष्ट्रीय जल मार्ग घोषित करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण विधेयक इस साल पारित कराया है। केंद्र सरकार ने दावा किया है कि कुल बीस हजार किलोमीटर लंबे नदी किनारों साढ़े सात हजार किलोमीटर लंबे समुद्र तट का विकास वह करेगी। इस क्रम में बीते दिनों वाराणसी से मारुति सुजुकी की कारों निर्माण सामग्री से लदे दो पोतों को रवाना भी किया गया। सरकार का कहना है कि जलमार्ग से पश्चिम बंगाल में इन कारों की लागत पांच हजार रुपए तक कम हो जाएगी। राष्ट्रीय जल मार्ग-1 का विकास जल

मार्ग विकास परियोजना के जरिए किया जा रहा है। इसकी फंडिंग विश्व बैंक द्वारा की जा रही है। इस पर कुल बयालीस सौ करोड़ रुपए की लागत आएगी। सरकार ने यह भी कहा है कि नदी तटों के विकास पर साढ़े पांच सौ से सात सौ अरब रुपए खर्च होंगे। जल परिवहन में सडक़ मार्ग के मुकाबले ढुलाई की लागत पांच फीसद से भी ज्यादा घट जाएगी। अभी एक टन माल की ढुलाई प्रति किलोमीटर सडक़ मार्ग से 2.50 रु., रेल मार्ग से 1.36 रु. और जल मार्ग से 1.06 रुपए पड़ती है। इसके अतिरिक्त, जल मार्ग से ढुलाई में प्रति टन किलोमीटर ईंधन की खपत भी कम हो जाएगी। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय जल मार्ग-1 जब समृद्ध हो जाएगा तब विमान की लैडिंग भी शुरू हो जाएगी। रो-रो सर्विस भी शुरू करने की योजना है, जिसके तहत लोग कार जैसे निजी साधनों के साथ गंतव्य तक सहजता से पहुंच सकेंगे। हालांकि अब तक 'रिवर इन्फारमेशन सिस्टम' विकसित नहीं हो पाया है। बजट की कमी नहीं हुई तो यह सपना भी पूरा होने में कम से कम चार साल तो लग ही जाएंगे।सडक़ रेल मार्ग के मुकाबले जल मार्ग से ढुलाई का खर्च छह फीसद कम हो जाएगा। अभी तो राष्ट्रीय जल मार्ग की शुरुआत वाराणसी से हल्दिया के बीच की गई है। वाराणसी, हल्दिया झारखंड के साहबगंज में मल्टी टर्मिनल भी बनाया जाएगा। पचास से ज्यादा छोटे टर्निमल फरक्का में छह सौ करोड़ की लागत से गेट बनाया जाएगा ताकि मालों की ढुलाई के साथ ही जलपोतों का संचालन बखूबी किया जा सके। सरकार चाहती है कि गंगा में केवल मालवाहक बल्कि आलीशान क्रूज भी चलें। देश के बड़े उद्योगपति अपना क्रूज खरीदें और उसी क्रूज से गंगा में उतरें। निकट भविष्य में सरकार ऐेसा विमान भी खरीदना चाहती है जो रन वे के अलावा पानी में भी उतरेगा।

लेकिन साथ ही यह अंदेशा भी है कि अरबों-खरबों के निवेश के बाद भी जलमार्ग कहीं दम तोड़ दें। इस आशंका से उबरने के लिए पहली जरूरत यह है कि गंगा या राष्ट्रीय जल मार्ग की अन्य नदियों में पानी की मात्रा कम नहीं होनी चाहिए।

अभी तो गंगा सफाई अभियान का हाल यह है कि फंड जरूर स्वीकृत हुआ है लेकिन धरातल पर कुछ दिख नहीं रहा है। विदेशों