चीन और पाक फंस गये हैं भारत के जाल में

  • 2016-09-24 08:00:00.0
  • उगता भारत ब्यूरो
चीन और पाक फंस गये हैं भारत के जाल में

चीन और पाकिस्तान भारत के परंपरागत शत्रु हैं। भारत चाहे उनकी ओर कितना ही सदाशयता से हाथ बढ़ाये परंतु इनकी ओर से भारत के लिए सदा दुश्मनी का हाथ ही बढ़ता आया है। पर अब मोदी सरकार चीन और पाकिस्तान को एक साथ अपने कूटनीतिक जंजाल में फंसाती नजर आ रही है। अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक परिदृश्य को यदि बारीकी से देखा जाए तो स्थितियां भारत के बहुत कुछ अनुकूल नजर आती हैं। थोड़ा देखिये, किस प्रकार भारत ने चीन व पाक को घेरने में सफलता प्राप्त की है? चीन का ग्वादर पोर्ट जाने का रास्ता बलूचिस्तान होकर जाता है और चीन ने वहां पर पाक सेना की मदद से जनता को मारने का सिलसिला चला रखा है, और साथ ही चीन वहां लगभग 2 अरब डॉलर का निवेश भी कर रहा है । अभी चीन को पता चल रहा है कि एनएसजी मुद्दे पर चीन ने भारत को हल्के में लेकर कितनी भारी गलती की है । 

जब चीन साउथ चाइना सागर पर अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रहा हो और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन उसके खिलाफ हो तब उसे यू.एन. में भारत के समर्थन की बहुत आवश्यकता है।
पिछले 2 वर्षो की खामोशी के बाद मोदी ने भारत के सभी राजनैतिक दलों को विश्वास में लेते हुए अचानक ही बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर पर बयान दे दिया, पीओके को भारत का अभिन्न अंग भी बता दिया, प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले 2 वर्षो से मोदी जी संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के लिए कोशिश कर रहे है, पर चीन हर बार अड़ंगा लगा रहा है।
ऊपर से चाइना भारत को कमजोर करने के लिए पाकिस्तान का साथ भी दे रहा है और पीओके और बलूचिस्तान में अपने फायदे और भारत को घेरने के लिए निर्माण भी कर रहा है।
अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में एशिया क्षेत्र में साऊथ चाइना सागर वाला हिस्सा (अधिकार) भी हार गया है, और अब वो चाहता है कि भारत उसका साथ दे, इसीलिए चाइना ने अपने विदेश मंत्री वांग यी को दिल्ली भेजा, और साथ में सन्देश भी भेजा कि एनएसजी के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसी समय का फायदा उठाया, और पीओके को भारत का अभिन्न अंग बता दिया और बलूचिस्तान के हितों की रक्षा करने और पाकिस्तान से उसे आजाद करवाने के लिए विश्व को संदेश भी दे दिया। और .... चीनी विदेशमंत्री भारत दौरे पर ग्वादर पोर्ट सिलसिले में समर्थन मांगने पहुंचे , वही दूसरी और मोदी जी ने सीधे पीओके की बात उठा कर चीन को बता दिए कि एनएसजी छोडो, पीओके पर हमारा समर्थन करो ।
मोदी के इस कूटनीतिक फैसले से पूरी दुनिया हैरान रह गई, चीन चारों ओर से फंसकर खड़ा हो गया है। चीन एनएसजी के बदले समर्थन की उम्मीद कर रहा था, लेकिन जो दांव मोदी ने चला उससे चीन के गले में हड्डी अटक गई है ।
पीओके पर समर्थन का मतलब है कि ग्वादर को भूल जाओ, और भारत से नाराजगी का मतलब  है कि वियतनाम, जापान जैसे अन्य देशों को भारत का समर्थन और साउथ चाइना सागर से चीन का अधिकार खत्म।

बलूचों ने उखाड फेंका पाकिस्तानी झण्डा
चाणक्यनीति कहती है कि जब दुश्मन कमजोर हो तब उस पर वार करो, यही है मोदी जी की सोची-समझी रणनीति। अब चाइना असमंजस में पड़ गया  है कि पीओके को पाकिस्तान का अंग बता कर पाकिस्तान की मदद की जाये या सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता देकर अपने साउथ चाइना सागर विवाद को सुलझाया जाये, सचमुच ऐसी विषम कूटनीतिक परिस्थितियों में चीन अब से पहले कभी नही फंसा था। 

हमारे देश का नेतृत्व और विशेषत: पीएम मोदी इस समय बड़ी सावधान से आगे बढ़ रहे हैं परंतु इनसबके बावजूद भी सावधान रहने की आवश्यकता है। क्योंकि 'सावधानी हटी और दुर्घटना घटी'  वाली कहावत पर हमारी सरकार को ध्यान देना चाहिए। 

अभी इस समय देश की एक प्रतिष्ठित पत्रिका द्वारा कराये गये सर्वे में मोदी और उनकी सरकार की लोकप्रियता में कोई कमी नही आयी है। 
बात साफ है कि देश के लोग अभी पीएम मोदी और उनकी सरकार के साथ हैं। परंतु लोगों के साथ का अभिप्राय यह नही कि वे अंधभक्त होकर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार का समर्थन करते ही रहेंगे।