बजी है रणभेरी, सीमा फिर घेरी, जवान होगी परीक्षा तेरी....

  • 2016-10-15 11:00:19.0
  • उगता भारत ब्यूरो
बजी है रणभेरी, सीमा फिर घेरी, जवान होगी परीक्षा तेरी....

शिव शरण त्रिपाठी
भले ही भारत पाकिस्तान के विरूद्ध तत्काल युद्ध की घोषणा न करें, भले ही भारत तत्काल सिन्धु जल समझौते को रद्द न करें पर मोदी सरकार पाकिस्तान को हर हाल में सबक सिखा कर मानेगी।
मोदी सरकार पाकिस्तान के विरूद्ध सैन्य कार्यवाही की शुरूआत गुलाम कश्मीर में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण कैम्पो को ध्वस्त करके कर सकती है। इससे ही भारत पाक के बीच तीसरे युद्ध का भी फ सला हो जायेगा।
मोदी को यह मंजूर नहीं !
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के पूर्व प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी व डॉ. मनमोहन सिंह की तरह बेबश अथवा कायर प्रधानमंत्री कहलाने की बजाय अपने को पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 श्रीमती इन्दिरा गांधी की तरह एक निर्णायक व ताकतवर प्रधानमंत्री कहलाना पंसद करेंगे।

इतिहास साक्षी है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में न केवल पाक समर्थित आतंकियो ने देश की आत्मा संसद पर हमला बोला था वरन् पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध भी थोपने का दु:साहस किया था पर श्री वाजपेयी दोनो ही मौकों पर सिवाय पाकिस्तान हुक्मरानों को घुडक़ी देने के निर्णायक कार्यवाही न कर सके थे।

इससे भी जघन्य कृत्य पाक समर्थित आंतकियों ने मुंबई में आतंकी हमला करके किया था जब कोई 160 निर्दोष लोग मौत के मुंह में चले गये थे। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इन घटनाओं से पूरा देश वैसे ही आक्रोशित था जैसा आज है। काश! उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्रियों ने पाकिस्तान को वैसा ही सबक सिखाया होता जैसा 1971 के युद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व0 श्रीमती इन्दिरा गांधी ने सिखाया था तो शायद पाकिस्तान पठानकोट एवं उरी के सैन्य कैम्पों में आतंकियों से हमले करवाने की आज स्थिति में ही न होता।

देश की जनता को उसी दिन का इंतजार है जब प्रधानमंत्री श्री मोदी पाकिस्तान को उसकी औकात बताने के लिये सेना को कंूच करने का हुक्म देंगे और जांबाज सेना उसे ऐसा सबक सिखायेंगी कि वो भारत में आतंकी हमले कराना तो दूर आइंदा नजर तक उठाने की हिम्मत न करेंगा।

कश्मीर के उड़ी स्थित सैन्य कैम्प में पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा 18 सैनिकों को मौत के मुंह में झोंकने से पूरा भारत देश आक्रोशित है। देश का हर व्यक्ति यही चाहता है कि देश को चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े पर पाकिस्तान को ऐसा सबक जरूर सिखाया जाये कि उसे अपनी औकात याद आ जाय।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक व अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में पाकिस्तान की जमकर खबर ली। उन्होने उड़ी हमले की तुलना 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान के हालात से करते हुये कहा कि इस आतंकी हमले के लिये जिम्मेदार लोगो को निश्चित तौर पर दण्डित किया जायेगा तथा उन्होने इस बात पर जोर दिया सेना बोलती नहीं बल्कि पराक्रम दिखाने में विश्वास करती है।

उन्होने कहा 'यह कायरतापूर्ण कृत्य पूरे देश को झकझोरने के लिए काफ था। इसको लेकर देश में शोक और आक्रोश दोनो है। प्रधानमंत्री ने कहा यह क्षति सिर्फ उन परिवारों को नहीं है जिन्होने अपने बेटे, भाई और पति खोए है। यह क्षति संपूर्ण देश की है। इसलिए आज मै वहीं कहूंगा जो मेने उस दिन (घटना के दिन) भी कहा था और आज फिर दोहराता हूं कि दोषियों की निश्चित रूप से दण्डित किया जाएगा। भारतीय सेना में विश्वास प्रकट करते हुए श्री मोदी ने कहा कि वह अपने पराक्रम में इस तरह के सभी षड्यंत्रों को विफल कर देगी।

उन्होने कहा ये (सैनिक) वे लोग है जो अदम्य साहस दिखाते है ताकि 125 करोड़ लोग शांतिपूर्ण ढंग से रह सके। श्री मोदी ने कहा कि हमें अपनी सेना पर गर्व है। लोगो और नेताओं को बोलने की अवसर मिलते है और वे ऐसा करते भी है परन्तु सेना बोलती नहीं है, सेना अपना पराक्रम दिखाती है। प्रधानमंत्री ने 11वीं कक्षा के एक छात्र का संदेश पढ़ा जिसने उड़ी की घटना को लेकर आाक्रोश प्रकट किया था और इसको लेकर कुछ करने की इच्छा जताई थी। इस छात्र ने सोचने के बाद वह संकल्प लिया कि वह रोजाना तीन घंटे अतिरिक्त पढ़ाई करेगा ताकि देश के लिए योगदान दे सकें।

श्री मोदी ने इस छात्र के रचनात्मक विचार की सराहना करते हुए कहा देश के लोगो में जो आक्रोश है उसका बहुत महत्व है। यह देश के जागने का प्रतीक है। यह आक्रोश कुछ करने जैसा है जब 1965 युद्ध (पाकिस्तान के साथ ) शुरू हुआ था तब लाल बहादुर शास्त्री देश का नेतृत्व कर रहे थे, उस समय देश में इसी तरह की भावना और आक्रोश था। वह देश भक्ति का ज्वार था।

उन्होंने कहा, उस समय लाल बहादुर शास्त्री जी ने बहुत ही उत्तम तरीके से देश के इस भाव से विश्व को स्पर्श कराने का प्रयास किया था। उन्होंने जय जवान, जय किसान का मंत्र देकर आम लोगों को देश के लिए कुछ करने को प्रेरित किया था।

श्री मोदी ने कहा, सेना को अपना उत्तरदायित्व निभाना चाहिए, हमें सरकार में अपना कत्र्तव्य निभाना चाहिए और नागरिकों को देशभक्ति की भावना के साथ रचनात्मक योगदान देना चाहिए। इसके बाद ही राष्ट्र निश्चित तौर पर नयी ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। अपने 35 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कश्मीर के लोगों से भी विशेष तौर पर बात करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, कश्मीर के लोगों ने राष्ट्र विरोधी ताकतों को साफ तौर पर समझना शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे वास्तविकता उनके सामने आ रही है वैसे-वैसे उन्होंने ऐसी ताकतों से दूरी बनानी शुरू कर दी है और शांति के पथ पर चलना आरंभ कर दिया है।

श्री मोदी ने कहा कि सभी मां-बाप की इच्छा है कि कश्मीर में स्कूल और कॉलेज सही ढंग से काम करना आरंभ कर दें और किसान चाहते हैं कि उनके उत्पाद देश के बाजारों में पहुंचें। उन्होंने कहा, आर्थिक गतिविधियां उचित ढंग से होनी चाहिएं। पिछले कुछ दिनों से व्यापारिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं।

श्री मोदी ने कहा, यह हम सभी जानते हैं कि शांति, एकता और सद्भावना हमारी समस्याओं को हल करने तथा प्रगति और विकास सुनिश्चित करने का माध्यम हं। हमारी आने वाली पीढिय़ों के लिए हमें विकास की नयी ऊंचाइयों पर पहुंचना होगा। मुझे पूरा भरोसा है कि हम बातचीत के माध्यम से सभी मुद्दों को हल कर लेंगे।

इसी क्रम में पाकिस्तान को सबक सिखाने की दृष्टि से सोमवार को 56 वर्षो पूर्व पाकिस्तान के साथ सिन्धु जल समझौते की समीक्षा के लिये एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गयी।

बैठक की अध्यक्षता करते हुये प्रधानमंत्री श्री मोदी ने साफ कहा कि 'खून के साथ पानी नहीं बह सकता।बैठक में यह भी तय किया गया कि भारत-पाकिस्तानके बीच सिंधु नदी को लेकर हर छह माह पर होने वाली बैठक अब नहीं होगी। इसके साथ ही श्री मोदी ने भारत की मंशा साफ कर दी कि उड़ी हमले के दोषियों को सजा दिलाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है। भारत ने फिलहाल सिंधु जल समझौते को तोडऩे की बात नहीं कही है लेकिन उसने अपने स्तर पर इस समझौते की समीक्षा करने और पहले से तय नियमों और मानकों के मुताबिक समझौते में शामिल नदियों के जल का पूरा इस्तेमाल करने का फैसला किया है। जानकारों की मानें तो भारत का यह कदम भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की चूलें हिला देने के लिए काफी है।

सोमवार को ही भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान के आतंकी शौक पर करारा प्रहार करते हुय कहा इस तरह के देशों को अंर्तराष्ट्रीय समुदाय में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिये। श्रीमती सुषमा स्वराज ने 5 दिन पहले इसी मंच से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण का बिन्दुवार जवाब दिया।

शरीफ के कश्मीर राग पर विदेश मंत्री ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और कोई इसे हमसे नहीं छीन सकता। उनका यह बयान इसलिये अहम है कि पाकिस्तान बार-बार कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग करता रहता है।

इसी बीच जो खबरें मिल रही है यदि उन पर भरोसा किया जाय तो मोदी सरकार किसी भी दिन सीमा पार पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे पाकिस्तानी आतंकी प्रशिक्षण केन्द्रों के विरूद्ध सैन्य कार्यवाही करके उन्हे नेस्ताबूत कर सकती है। समझा जा रहा है यदि इस कार्यवाही का पाकिस्तान ने प्रतिरोध करने हेतु सैन्य मुकाबला शुरू किया तो फि र भारत पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिये किसी हद तक जाने में जरा भी गुरेज न करेगा।

जानकार सूत्रों का कहना है कि भारत पाक के बीच इस अति सम्भावित तीसरे युद्ध से पाकिस्तान का अस्तित्व ही दांव पर लग जायेगा। कारण की ऐसी स्थिति में मौका मिलते ही बलूचिस्तान अपने को पाकिस्तान से अलग एक स्वंत्रत राष्ट्र घोषित करने में जरा भी देर नहीं लगायेगा। बहुत मुमकिन है कि बलूचिस्तानी उसी तरह भारत की सेना की मदद करें व उनके साथ पाकिस्तान से युद्ध लडृने में शामिल हो जाये जैसे 1971 में तत्कालीन पूर्वी बंगाल के लोगो ने पाकिस्तान के विरूद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी थी।