उग्रवाद ने नाप देख ली छप्पन इंची सीने की

  • 2016-09-30 04:15:14.0
  • राकेश कुमार आर्य

उग्रवाद ने नाप देख ली छप्पन इंची सीने की

पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादियों के अड्डों पर भारत की सेना ने जिस वीरता और शौर्य के साथ हमला कर अपने 18 रणबांकुरे सैनिकों की शहादत का प्रतिशोध लिया है उसके लिए वह बधाई की पात्र है। इसके लिए राजनैतिक नेतृत्व की इच्छाशक्ति अब से पूर्व आड़े आती रही थी। जिसके अभाव के चलते हम कभी शत्रु को उसकी दुष्टता का 'उचित पुरस्कार' नही दे पाये। परिणाम ये हुआ कि देश पराजित मानसिकता के भावों से भर सा गया। हमारे सैनिकों के हाथों में हथियार तो दिये गये परंतु उनसे वह अपनी भी रक्षा न कर पाएं ऐसी परिस्थितियां उनके लिए बनाई गयीं। लेकिन आज हमारा वीर सैनिक न केवल अपनी रक्षा करने के लिए अपितु अपने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए भी खुला छोड़ दिया गया है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर, विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और गृहमंत्री राजनाथसिंह सहित सभी बड़े नेता इस बात के लिए बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने भी पूर्ण सूझबूझ और संयम का परिचय देते हुए उचित समय पर सही काम करके दिखा दिया है।

हम पूर्व में भी यह लिख चुके हैं कि इस समय ना कोई भाजपाई है, ना कोई सपाई, बसपाई, कांग्रेसी, या कम्युनिस्ट है, इस समय सभी भारतवासी हैं और अपनी सेना और अपने नेतृत्व के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। हमारे कोई साम्प्रदायिक मतभेद नही, और न ही कोई भाषाई या क्षेत्रीय संकीर्णता इस समय हमारे भीतर है, हम केवल भारतवासी हैं और अपने राष्ट्रीय भावों से ओत-प्रोत होकर इस समय हमें केवल शत्रु की आंख दिखाई दे रही है। राष्ट्रवाद का और राष्ट्रप्रेम का यह भाव ही हमें आने वाले दिनों में सफलता दिलाएगा। युद्घोन्मादी भाषा या व्यंग्यपूर्ण बातें आलोचना को निंदा में परिवर्तित कर देती हैं इसलिए अपनी सेना के मनोबल को बनाये रखने के लिए और अपने नेतृत्व को यह अहसास कराये रखने के लिए कि हम सब भारतवासी उनके साथ हैं, यह आवश्यक है कि हमारी भाषा गर्वीली हो लेकिन चुटीली नही। 

भारत के इस अभियान में विश्व की बड़ी शक्तियां हमारे साथ हैं और पाकिस्तान को हमारी कूटनीति ने इस समय मित्रविहीन बनाकर अकेला खड़ा कर लिया है। यह बहुत अच्छा संयोग है और इस काम में जिन-जिन लोगों ने अपना सहयोग दिया है वह भी धन्यवाद और बधाई के पात्र हैं। पाकिस्तान चोरी करने अर्थात छद्मयुद्घ में अपना कौशल प्रदर्शन करता रहा है परंतु अब जब भारत के शेरों ने अपनी 56 इंची छाती के होने का प्रमाण देते हुए प्रतिशोध और केवल प्रतिशोध की सौगंध उठाकर युद्घ के लिए प्रयाण कर लिया है तो शत्रु को नानी याद आ गयी है। उसे यह मानने में भी संकोच हो रहा है कि भारत के शेरों ने उसकी सीमा में घुसकर आतंकवादी अड्डों को नेस्तनाबूद करने का साहसिक कार्य पूर्ण कर लिया है। सचमुच हमारी विदेशमंत्री सुषमा स्वराज अभी चार दिन पहले यूएन में दिये गये अपने भाषण में जो कुछ कहा था कि जो शीशे के घरों में रहते हैं वे दूसरे के घरों में पत्थर नही मारा करते-वह आज सच साबित हो रहा है। क्योंकि शीशे के घरों में रहने वाले चोर घर को फुड़वाकर भी यह कह रहे हैं कि हम कोई पत्थर नही मारा गया। 

अच्छा हो पाकिस्तान मानवता के हित में और अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के दृष्टिकोण से अभी तक के अपने पापों का और प्रायश्चित कर ले और जो कुछ अभी तक हो चुका है उस पर पूर्ण विराम लगाते हुए मानवता के खून को बहाने से अपने आपको बचा ले। भारत तो भारत ही है, वह अब भी मान सकता है।

पीओके में सीमा पार जाकर सेना की साहसिक कार्रवाही पर कवि कमल आग्नेय की रचना सचमुच हम सब की भावनाओं को प्रकट करने में समर्थ है-
राष्ट्रद्रोह के रावण की सांसो का घोड़ा ठहर गया
सरहद पार तिरंगा अपना स्वाभिमान से लहर गया
आतंकवाद से लडऩे की शक्ति आई दरबार में
इसीलिए सेना ने मारा एलओसी के पार में
आज सियासत बदल गई है डरते डरते जीने की
उग्रवाद ने नाप देख ली छप्पन इंची सीने की
अरे शरीफों आँख खोलकर समझो जरा इशारों को
राख समझकर अब मत छूना आग्नेय अंगारों को
वर्ना घायल रावलपिंडी अपना खुदा पुकारेगी
जब भारत की सेना अबकी अंदर घुसकर मारेगी