एक संतुलित और दूरगामी बजट

  • 2017-02-06 09:30:26.0
  • राकेश कुमार आर्य

एक संतुलित और दूरगामी बजट

केन्द्रीय वित्तमंत्री श्री अरूण जेटली द्वारा प्रस्तुत 2017-18 वित्तीय वर्ष का आम बजट कई मामलों में अनूठा और सराहनीय है। इस बजट को पहली बार एक फरवरी को प्रस्तुत किया गया है, इससे पूर्व रेल बजट और आम बजट फरवरी के अंत में आया करते थे, रेल बजट को रेलमंत्री तथा आम बजट को भारतीय वित्तमंत्री प्रस्तुत करते रहे हैं, परंतु इस बार 92 वर्ष बाद रेल बजट और आम बजट को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।
इस बजट के बारे में विपक्षी दलों की चिंता थी कि यह बजट पांच प्रांतों में चल रहे विधानसभा चुनावों के कारण चुनावी बजट होगा। जिसमें केन्द्र सरकार इन पांच प्रांतों की जनता को अपने पक्ष में लाने के लिए कुछ विशेष छूट देकर मतदाता को प्रसन्न करने का प्रयास करेगी। परंतु ऐसा हुआ नहीं, यद्यपि देश का सारा विपक्ष इस प्रतीक्षा में लोकसभा में मौन साधे बैठा रहा कि वित्तमंत्री जैसे ही चुनावी प्रांतों के लिए कुछ विशेष घोषणा करें-वैसे ही वे उन्हें 'लपक लें।' वित्तमंत्री अरूण जेटली ने विपक्ष को ऐसा कोई अवसर प्रदान नहीं किया, और वह अंत तक वित्तमंत्री के भाषण पर चिल्लाया नहीं। कांग्रेस के राहुल गांधी और खडग़े ने यद्यपि बजट की आलोचना की है, पर यह आलोचना केवल आलोचना के लिए की गयी आलोचना है। जिसके पीछे कोई तार्किक शक्ति नहीं है।
वित्तमंत्री अरूण जेटली ने 2017-18 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए दस प्रतिशत से अधिक बढ़ोत्तरी करते हुए दो लाख चौहत्तर हजार एक सौ चौदह करोड़ का प्रावधान किया है। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने यह स्पष्ट किया है कि इस आवंटित धनराशि में पेंशन संबंधी खर्च शामिल नहीं है। इस राशि में 86 हजार करोड़ रूपये योजनागत व्यय के लिए रखे गये हैं। पिछले बजट में इस मद में 78 हजार करोड़ रूपये की राशि रखी गयी थी।
आज जब देश के लिए चारों ओर से शत्रुओं ने चुनौती खड़ी कर रखी है तब रक्षा बजट में की गयी यह बढ़ोत्तरी प्रसन्नता का विषय है। इसके अतिरिक्त अपने सैनिकों और सुरक्षाबलों को आधुनिकतम हथियार उपलब्ध कराकर उनके खाने-पीने और रहने-सहने की भी उचित व्यवस्था की जानी अपेक्षित है। अभी पिछले दिनों कुछ सैनिकों ने अपनी कुछ शिकायतें 'सोशल मीडिया' पर व्यक्त कर दीं थी। अच्छा हो कि आने वाले वित्तवर्ष में केन्द्र सरकार सैनिकों को ऐसी सुविधाएं प्रदान करे कि उन्हें ऐसी कोई शिकायत करने का ऐसा अवसर न मिले।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए सरकार ने 3.96 लाख करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन किया है। जेटली ने कहा कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए 2017-18 में कुल आवंटन 3 लाख छियानवें हजार एक सौ पैंतीस करोड़ का होगा। उन्होंने कहा कि इतने भारी निवेश से बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जा सकेगा और रोजगार के अधिक अवसर पैदा किये जा सकेंगे, वित्तमंत्री का मानना है कि पूरे परिवहन क्षेत्र रेलवे, सडक़, जहाजरानी, के लिए मैं दो लाख इकतालीस हजार तीन सौ सतासी करोड़ रूपये के प्रावधान का प्रस्ताव करता हूं।
वित्तमंत्री द्वारा जो बजट पेश किया गया है उससे नौकरियों व कौशल प्रशिक्षण को प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है, युवाओं को रोजगार दिये जाने की पूरी कोशिश की गयी है। श्री जेटली का मानना हैै कि इससे हमारे उन युवाओं को मदद मिलेगी जो देश केे बाहर नौकरी के अवसर चाहते हैं। वित्तमंत्री अरूण जेटली ने कृषि क्षेत्र के लिए रिकार्ड दस लाख करोड़ रूपये रखने का प्रावधान किया है, जो कि किसानों को मिलेंगे। इसमें किसानों को उदार ऋण उपलब्ध कराने और पूर्वोत्तर व जम्मू कश्मीर के किसानों के लिए विशेष उपाय करने की व्यवस्था की गयी है। प्रधानमंत्री फसल योजना का दायरा 2018-19 तक बढ़ाया जाएगा। 18 प्रतिशत की रफ्तार से स्वच्छ भारत को बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनाये जाने की योजना है। यह भी प्रसन्नता की बात है कि इस बजट में 9 हजार करोड़ रूपये प्रधानमंत्री फसल योजना के लिए रखे गये हैं। बजट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकार इस समय 133 किलोमीटर सडक़ों का निर्माण प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्र में कर रही है। सरकार का यह आंकड़ा यदि वास्तव में सच है तो इस पर सारे देशवासियों को गौरवानुभूति होनी ही चाहिए।
सरकार द्वारा प्रस्तुत किये गये बजट में सबसे अच्छी बात यह रही है कि अब सभी राजनीतिक दलों को काला धन इकट्ठा करके चुनावों पर खर्च करने या उस धन से गुलछर्रे उड़ाने की उनकी प्रवृत्ति पर उन्हें कुछ सोचना पड़ेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2000 से अधिक की धनराशि अब कोई भी राजनीतिक दल नगद रूप में चुनावी चंदे के रूप में नहीं ले सकेंगे। यह व्यवस्था चुनाव-सुधार की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम सिद्घ हो सकती है। हमारे राजनीतिक दल चंदे के नाम पर 'मोटा माल' मार रहे हैं, इस देश में अधिक राजनीतिक दलों के होने का एक कारण यह भी है कि चंदे के रूप में हर व्यक्ति 'मोटा माल' मारने के लिए लालायित रहता है। यदि मोदी सरकार ने अपने राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए इस दिशा में सचमुच कोई अच्छा कदम उठाने का साहस किया तो निश्चय ही इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
बजट डिजिटल अर्थ व्यवस्था की ओर संकेत कर रहा है और गहराई से देखने पर अधिकतर अर्थशास्त्रियों ने बजट की सराहना की है। सरकार अगले वित्तवर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में दस हजार करोड़ की शेयर पूंजी डालेगी और जरूरत होने पर और राशि दी जाएगी। श्री जेटली ने स्पष्ट किया है कि 'इंद्रधनुष योजना' के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 2017-18 में दस हजार करोड़ रूपये की पूंजी मिलेगी। भारत नेट परियोजना के लिए आवंटन बढ़ाया गया है, चमड़ा फुटवीयर के लिए नई योजना दी गयी है, माध्यमिक शिक्षा नवोन्मेष निधि का प्रावधान किया गया है। ऐसी ही अनेकों सुविधाओं और संभावनाओं को पेश करता हुआ बजट हर दृष्टिकोण से संतुलित और दूरदृष्टि दिखाने वाला बजट है। हमें आशा करनी चाहिए कि इस बजट के निश्चय ही शुभ परिणाम आएंगे।