बाबा का आवाहन : मेरी मां शेरों वाली है

अहिंसावादी समाज की स्थापना के लिए तथा समाज के शांतिप्रिय लोगों के अधिकारों की सुरक्षार्थ भारत सदा से ही शास्त्र के साथ शस्त्र का समन्वय स्थापित करके चलने वाला राष्ट्र रहा है। यह दुर्भाग्य रहा इस देश का कि इसे कायरों की सी अहिंसा वाला देश बना दिया गया। जिससे हम यह भूल गये कि अहिंसा […]

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अच्छे बगीचे के निकम्मे माली हैं राहुल गांधी

राकेश कुमार आर्यकेन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने पिछले दिनों अपने एक साक्षात्कार में कहा था कि कांग्रेस वैचारिक भटकाव का शिकार है। हम अब तक राहुल के विचारों की सिर्फ झलकियां ही देख सके हैं। वह इन विचारों को बड़ी घोषणाओं में तब्दील नहीं कर सके हैं।कानून मंत्री ने चाहे जिन परिस्थितियों में ये […]

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कांग्रेस देश के लिए अभिशाप या वरदान

लॉर्ड मैकाले ने 1830 में अपनी शिक्षा प्रणाली को भारत में लागू करके अपनी मां के लिए एक पत्र में लिखा था कि अगले 30 वर्ष में भारत में कोई मूर्ति पूजक नहीं रहेगा। लार्ड मैकाले का आशय स्पष्ट था कि आने वाले तीस वर्षों में भारत को काले अंग्रेजों के माध्यम से ही परास्त […]

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जानिए अब तक के उपराष्ट्रपतियों के बारे में

यू.पीए. की ओर से सोनिया गांधी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को ही अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। हामिद अंसारी का दूसरी बार इस पद के लिए उम्मीदवार बनना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वह राष्ट्रपति पद के कितने प्रबल दावेदार थे। उनकी पत्नी ने अजमेर की दरगाह […]

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हिंग्स बोसोन: भारत स्वयं को समझे

ब्रहमांड के अनसुलझे रहस्यों की खोज में लगे वैज्ञानिकों ने जिस हिग्स बोसोन की खोज की है, उससे निश्चित ही मानवता लाभान्वित होगी। इसे हमारे वैज्ञानिकों ने गॉड पार्टिकल या ईश्वरीय कण का नाम दिया है।हमारे यहां प्राचीन काल में वैज्ञानिकों को ऋषि (चिंतन का अधिष्ठाता) कहा जाता था। चिंतन की गहराई कोई न कोई […]

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…… यही था भारत का वास्तविक साम्यवाद

राकेश कुमार आर्य पिछले अंक का शेष …अब सारे कार्यों के लिए लोग राज्य की ओर टकटकी लगाये रहकर देखते रहते हैं। अधिकार परस्त लोग निकम्मे होते हैं और कम्युनिस्टों ने ऐसे ही समाज का निर्माण किया है।जबकि भारत की आश्रम व्यवस्था का तो शाब्दिक अर्थ भी आ+श्रम=श्रम से परिपूर्ण है। ब्रहम चर्यश्रम में विद्याध्ययन […]

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भारत की “उदारता” और पाक के क्रूर “मज़ाक” का सिलसिला

इतिहास से हम क्या सीख सकते हैं? इस बात का उत्तर यही है कि इतिहास की हमारे लिए सबसे बड़ी सीख यही है कि इससे हम कुछ सीखते नही है। इसलिए इतिहास के विषय में यह झूठ एक सच के रूप में स्थापित हो चुका है कि इतिहास स्वयं को दोहराता है। जबकि सच ये […]

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भारतीय साम्यवाद और कम्युनिस्ट विचार धारा में मौलिक अंतर है

पिछले अंक का शेष … सारे संसार को एक विश्व संस्था के रूप में शासित करके चक्रवर्ती राज्य स्थापित करने की भावना में इसके लिए कोई स्थान नही है। यहां व्यष्टि से समष्टिï की ओर दृष्टिïपात करना है। समष्टिï में प्राणिमात्र का भला करना है। अपने विचार में बाधक लोगों को सही रास्ते पर लाना […]

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मोहन की बंसरी पर मोदी की तान

नरेन्द्र मोदी के समर्थन में जिस प्रकार भाजपा और संघ उतरकर मैदान में आये हैं उससे मोदी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी मजबूत हुई है। आर. एस. एस. के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लातूर में स्पष्ट कह दिया है कि एक हिन्दुत्ववादी व्यक्ति प्रधानमंत्री क्यों नही हो सकता? बात सही भी है क्योंकि हिन्दुत्व एक […]

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कांग्रेस और जद (यू) की बिछती शतरंजी चालों के चलते लंगर कसे मोदी को देखकर भागते नितीश

नई दिल्ली। नितीश राजग क्यों छोडऩा चाहते हैं? यह बात आज की तारीख में बड़ी अहम हो गयी है कि इस प्रश्न का उत्तर खोजा जाये। ऊपरी तौर पर वह नरेन्द्र मोदी से खिन्न और उनके जातीय विरोधी नजर आते हैं। लेकिन भीतर ही भीतर उनके दिल में भी एक नई महत्वाकांक्षा जन्म ले चुकी […]

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