क्या हिंदू होना इस देश में एक गुनाह है?

राजीव गुप्ता प्रकृति कभी भी किसी से कोई भेदभाव नहीं करती और इसने सदैव ही इस धरा पर मानव-योनि में जन्मे सभी मानव को एक नजर से देखा है। हालाँकि मानव ने समय – समय पर अपनी सुविधानुसार दास-प्रथा, रंगभेद-नीति, सामंतवादी इत्यादि जैसी व्यवस्थाओं के आधार पर मानव-शोषण की ऐसी कालिमा पोती है जो इतिहास […]

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शिक्षा में सिद्ध प्रयोग का साधक

कलकत्ते में पैदा हुए, दिल्ली आई,आई टी से सिविल इंजिनियरिंग मे पढ़ाई की और कुछ दिन तक उत्तर बिहार में रसायन का उद्योग चलाया। लेकिन मन उखड़ा और कुछ अलग करने की धुन लगी तो चले आये मसूरी। पिछले बीस साल से सिद्ध संस्था के माध्यम से मसूरी के आस पास के इलाके में शिक्षा […]

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प्रधानमंत्री जी! कश्मीर के दर्द को सुनो

सम्मानीय, प्रधानमंत्री जी, सादर अभिवादन। महोदय, आशा है आप सानन्द होंगे। दिल्ली की चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था और उसमें भी आपका निवास स्थान, किसकी हिम्मत है कि उसकी ओर कोई नजर उठाकर भी देख ले। सवा अरब जनता का प्रधानमंत्री यह हक भीरखता है कि उसे पूरी सुरक्षा व्यवस्था मिले। आज आप दूसरी पारी खेलने […]

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भारत में कानूनी व्यवस्था-गौ वंशीय पशु पर अत्याचार का कानून

हरिशंकर राजपुरोहितभारत में परंपरा से गाय व गौ धन को पशु होने पर भी अधिक सुख व लाभ देने वाली प्राणी होने से पवित्र मानकर पूजा की जाती रही है। भगवान कृष्ण ने इसकी रक्षार्थ गौ-वर्धन पर्वत उठा लिया था अनेक लोगों ने विभिन्न आराधना व तप त्याग किया है। कामधेनु को प्राप्त करने के […]

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भारत का प्राचीन गौरव कोई कपोल कल्पना नही

दीनानाथ मिश्राभारतीय बुद्घिजीवियों के राष्ट्रीय स्वाभिमान और आत्म-सम्मान को हो क्या गया है? उनमें प्राचीन भारत की विरासत के बारे में इतना हीन भाव क्यों है? क्या भारत का इतिहास मुस्लिम आक्रमणों से चालू होता है? इसके पहले के भारत में कुछ था ही नही? इसके पहले के भारत में कुछ था ही नही? क्या […]

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बाघों के इलाके में पर्यटन का मजा ही कुछ और है

प्रमोद भार्गवसर्वोच्च न्यायालय की रोक के चलते अब सैलानी राष्ट्रीय उधोगों और अभयारण्यों में स्थित बाधों के प्राकृतिक आवास स्थलों के निकट नहीं धूम सकेंगे। न्यायालय ने सभी राज्यों को बाघ्यकारी आदेश देते हुए कहा है कि बाघों के भीतर क्षेत्र ;कोर एरियाद्ध को 10 किलोमीटर के दायरे तक अधिसूचित किया जाए और यह क्षेत्र […]

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अंधे क्या ढोएंगे इस राष्ट्र को!

अपना राष्ट्र एक भूमि का टुकड़ा ही तो नही है न वाणी का एक अलंकार है और न मस्तिष्क की कल्पना की एक उड़ान मात्र है। वह एक महानतम जीवंत शक्ति है, जिसका निर्माण उन करोड़ों अरबों जनों की शक्तियों को मिलाकर हुआ है। जैसे समस्त देवशक्तियों को एकत्र कर बलराशि संचित की गयी और उसे […]

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समाज के समक्ष प्रमुख चुनौती – स्वास्थ्य की सुरक्षा

समाज के समक्ष प्रमुख चुनौती समाज की उन्नति के लिए स्वास्थ्य अनिवार्य है। स्वस्थ समाज में प्रति व्यक्ति आय स्वत: बढ़ जाती है। हमारा देश विकासशील है। देश का बहुत बड़ा हिस्सा गरीबी में जीवन यापन कर रहा है। स्वास्थ्य के अधिकार के कई अंग हैं जिसमें पोषण, स्वच्छता, जल और पर्यावरण और स्वास्थ्य की […]

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मेरी मौत के लिए अरुणा चड्ढा और गोपाल कांडा जिम्मेदार हैं

दिल्ली स्थित अपने घर में खुदकुशी करनेवाली एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा ने मरने से पहले अपने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए सीधे सीधे हरियाणा के एक नेता गोपाल गोयल कांडा और अरुणा चड्ढा को जिम्मेदार ठहराया है। गीतिका शर्मा ने अपने सुसाइड नोट में सीधे तौर पर इन दोनों का नाम लेते हुए कहा […]

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प्रशिक्षित होने के बाद पत्रकारिता नहीं करते एक चौथाई छात्र

पत्रकारिता पेशे में अपेक्षा के अनुरूप पैसा नहीं मिलने और कामकाज की स्वतंत्रता के अभाव में देश में प्रशिक्षित होने के बाद भी एक चौथाई पत्रकार पत्रकारिता को अपना पेशा नहीं बनाते। मीडिया स्टडीज ग्रुप और जन मीडिया जर्नल ने भारतीय जनसंचार संस्थान के 1984-85 से लेकर 2009-10 शैक्षणिक सत्र के छात्रों की प्रतिक्रिया के […]

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