अपराध व नशा माफिया की गहराती जड़ें

  • 2016-04-16 12:30:22.0
  • प्रो. एनके सिंह

अपराध व नशा माफिया की गहराती जड़ें

प्रदेश में राजनीतिक अव्यवस्था देखने को मिली है, लेकिन हालात में सुधार के लिए अब पुलिस प्रशासन को और गंभीर होना होगा। जरूरत इस बात की है कि गैर जरूरी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की बर्बादी के बजाय प्रदेश के उन स्थानों का चयन किया जाए, जहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की वास्तव में बहुत जरूरत है। सिर्फ कैमरे लगा देने से भी बात नहीं बनेगी, बल्कि उससे भी ज्यादा जरूरी है कि हर दिन उनकी फुटेज के विश्लेषण और कैमरों की देखरेख का इंतजाम हो। पुलिस को प्रदेश के कुछ अति संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां चौकसी को बढ़ाना होगा।

पिछले पांच वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश में आपराधिक मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। हिमाचल के पंजाब से सटे इलाकों में नशा कारोबार हैरतंगेज तरीके से फल-फूल रहा है। प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में अपराधी किसी वारदात को अंजाम देने के बाद पड़ोसी राज्य पंजाब में भाग जाते हैं। आम तौर पर हिमाचल प्रदेश की पहचान एक शांतिप्रिय और कानून व्यवस्था में स्थिरता वाले राज्य के तौर पर होती रही है। फिर भी बढ़ते अपराध से दूषित होते माहौल के कारण हिमाचल की साख का धक्का पहुंचा है। कहना न होगा कि बढ़ते राजनीतिक दखल और पुलिसिया तंत्र के कमजोर पड़ते प्रभाव से हालात और विकट हुए हैं। अभी हाल ही में शिवबाड़ी की ऐसी ही एक घटना सामने आई है, जिसमें आईटीबीपी में सेवाएं देने के बाद दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जब वह अपने दैनिक काम से वापस लौट रहा था, उसी दौरान वह लापता हो गया था। प्रत्यक्ष दर्शियों का कहना है कि कुछ लोग उसे पीट रहे थे और बाद में वे लोग उसे अपनी कार में डालकर होशियारपुर की ओर ले गए थे। अब तक पंद्रह दिनों से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन जिस कार में आरोपी भागे थे, उसका कहीं कोई अता-पता नहीं चल सका है, जबकि उस व्यक्ति का शव होशियारपुर को जाने वाली सडक़ पर मिला था। हमारी कानून एवं व्यवस्था संस्थाएं कितनी लापरवाह हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि होशियारपुर शहर के प्रवेश द्वार पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे। हादसे के बाद जब सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, तो उसके बाद इन संस्थाओं की लापरवाही उजागर हुई थी। जहां एक तरफ सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे, वहीं सीमा के पास निकास स्थान के बजाय उन्हें शहर के बीच में लगाया हुआ है। अपराधी किसी भी वारदात को अंजाम देने के बाद हिमाचल की सीमा तक जाने वाली एक अन्य सडक़ से निकलते हुए इन कैमरों से आसानी से बच निकलते हैं। ऐसी अव्यवस्थाओं को लेकर गगरेट की जनता और व्यवसायियों में कई मर्तबा असंतोष देखने को मिलता रहा है, लेकिन हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। एक प्रतिनिधिमंडल ने जब अपराध से निपटने के बारे में एसपी ऊना से पूछा, तो उन्होंने इसके लिए कुछ और वक्त की मांग की।

नशाखोरी और नशा कारोबार पर कोई उचित नियंत्रण न होने की वजह से मुश्किलें और बढ़ रही हैं। हर दस में से लगभग छह युवाओं में नशाखोरी की लत का अनुमान है। यहां आसपास के इलाकों में उन लोगों की भी पहचान है, जो नशीले व गैर कानूनी पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से कर रहे हैं। ऐसी अशंका है कि पुलिस तंत्र भी नेताओं के भारी दबाव तले काम कर रहा है। जिन मामलों में पुलिस दोषियों तक पहुंच पाती है, वहां भी दोषी राजनीतिक आकाओं के आदेश से छूट जाते हैं। पार्वती घाटी और मनाली के कई इलाके रेव मून पार्टियों के अलावा नशीले पदार्थों की बिक्री का केंद्र बन चुके हैं। अगर कोई भी इंटरनेट पर खोज करे, तो प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में गरमागर्म पार्टियों के लिए किए जाने वाले खुले निमंत्रण देख सकता है। धर्मशाला के बारे में भी सूचना है कि वहां करीब तीन दर्जन लोग मुद्रा को अवैध तरीके बदलने के गोरखधंधे में संलिप्त हैं। वर्ष 2014 में पुलिस ने भी आपराधिक मामलों की समीक्षा में इस बात कबूल किया था कि प्रदेश में दुष्कर्म के 111 की अपेक्षा उस वर्ष 129 मामले दर्ज किए गए। हत्या के करीब 30 फीसदी मामले अनसुलझे थे, जबकि पुलिस ने स्वयं भी इससे थोड़े कम मामले होने का दावा किया।

अपराध का सबसे ज्यादा विचलित करने वाला स्वरूप प्रदेश से महिलाओं का गायब हो जाना है, जो कि अब एक सामान्य किस्म का अपराध बन चुका है। वर्ष 2011 में माननीय उच्च न्यायालय ने मामले में दखल देते हुए पुलिस को इस मामले में विशेष प्रयास करने को कहा था। गुमशुदा महिलाओं की संख्या का अनुमान करीब 860 के करीब है, जबकि इसके सबसे ज्यादा मामले सीमावर्ती जिला ऊना में सामने आए। अकेले ऊना से ही करीब 166 महिलाएं लापता बताई जाती हैं। अब तक महिलाओं के खिलाफ 1000 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। प्रदेश में राजनीतिक अव्यवस्था देखने को मिली है, लेकिन हालात में सुधार के लिए अब पुलिस प्रशासन को और गंभीर होना होगा। जरूरत इस बात की है कि गैर जरूरी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की बर्बादी के बजाय प्रदेश के उन स्थानों का चयन किया जाए, जहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की वास्तव में बहुत जरूरत है। सिर्फ कैमरे लगा देने से भी बात नहीं बनेगी, बल्कि उससे भी ज्यादा जरूरी है कि हर दिन उनकी फुटेज के विश्लेषण और कैमरों की देखरेख का इंतजाम हो। पुलिस को प्रदेश के कुछ अति संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां चौकसी को बढ़ाना होगा। इस संदर्भ में मैंने दो स्थानों पर पहरे कड़े करने का सुझाव दिया था। पहला मनाली के ऊपरी क्षेत्र और मकलोडगंज। दूसरा पंजाब की सीमा के साथ लगते गगरेट व बद्दी। ये दो ऐसे रूट हैं, जो अमूमन अपराधियों और नशा कारोबारियों द्वारा अपनाए जाते हैं।

जनता में भी अब यह एक आम विश्वास बन चुका है कि ज्यादातर अपराधी प्रदेश की सीमाओं के बाहर से आते हैं, जिसमें पंजाब का नाम सबसे ऊपर है। वहीं मादक पदार्थों की आपूर्ति पाकिस्तान से होती है। हिमाचल के गांव आज भी अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं और अपराध में इनकी संलिप्तता कम है, जबकि बाहर से आने वाले अपराधी ही अपराध को अंजाम देते हैं। मैं वन से घिरे एक गांव में पिछले दस वर्षों से रह रहा हूं और यहां अपराध की एक भी घटना सामने नहीं आई।

इस बात में कोई संदेह नहीं कि हिमाचली आम तौर पर शांतिप्रिय व प्रसन्नचित होते हैं। हिमाचलियों का यही गुण सरकार पर दोहरी जिम्मेदारी डालता है कि वह कानून एवं व्यवस्था संस्थाओं को सतर्क करे और भोलीभाली जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन एजेंसियों को उचित प्रशिक्षण भी दे। इससे भी बढक़र प्रदेश के धार्मिक स्थल, जैसे कि मां चिंतपूर्णी मंदिर दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं को बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन स्थानों पर भी पर्यावरण की रक्षा करते हुए सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करने होंगे। प्रशासन को भी अब ढुलमुल रवैया छोडऩा होगा, क्योंकि यह आम तौर पर देखने को मिलता रहा है कि मेलों या तीर्थ यात्राओं के दौरान कूड़े-कचरे व जूठन के खुले में निपटारे के मार्फत पर्यावरण को क्षति पहुंचाने की आजादी दी जाती रही है।
-प्रो. एनके सिंह