महंगाई के मुद्दे पर असफल होती मोदी सरकार

  • 2016-08-30 07:30:50.0
  • उगता भारत ब्यूरो
महंगाई के मुद्दे पर असफल होती मोदी सरकार

कृषि प्रधान राष्ट्र होते हुए भी भारत मे निरंतर बढ़ती महंगाई चिंता का विषय है, जिसने आम लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। किसी भी राजनीतिक दल को या राजनीतिज्ञ को जनता में खुशहाली लाने या गरीबी हटाने की चिंता नही है। महंगाई के हमाम में सब नंगे हैं।

देश के राजनीतिक दल अपने राजनीतिक लाभ के लिये आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उस समय संसद में उठाकर गर्माते हैं, जब किसी प्रदेश में चुनाव रहे होते हैं। उसके बाद ये मौन साध लेते हैं। अंत में आम आदमी को महंगाई से लडऩे के लिये अकेला छोड़ दिया जाता है, क्योंकि इन राजनीतिज्ञों पर तो महंगाई की मार पड़ती नही, मार पड़ती है तो आम आदमी पर।

 जिनकी चिंता कोई नही करता दिखाई देता। 2014 के लोकसभा चुनाव में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार, महंगाई, आतंकवाद राष्ट्र सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दे देश की जनता के सामने रखे और लोगों से वोट मांगे

थे। लोगों ने भी उन विश्वास करते हुए उन्हें अपना मत दिया था। जिसके चलते वह आज देश के प्रधानमंत्री हैं।

कुछ सीमा तक मोदी अपने चुनावी वायदों को पूरा करने में सफल रहे हैं, उनमें लोगों का विश्वास भी बरकरार है, परंतु बहुत कुछ करना शेष है। एक सर्वे के अनुसार देश के भीतर 2014 में जहां 62 हजार भ्रष्टाचार के मुकदमे दर्ज हुए थे, वहीं अब 2016 में यह संख्या तीस हजार हो गयी है। स्पष्ट है कि पचास प्रतिशत भ्रष्टाचार खत्म हुआ है।

पर देश में आतंकवाद समाप्त  नही हुआ है, हां इसमें कमी अवश्य महसूस की जा रही है। देश की सुरक्षा के क्षेत्र में भी बहुत कुछ करना शेष है, देश के रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर ने देश के रक्षा बजट में कटौती करके अच्छा काम नही किया है। देश की सीमाएं सुरक्षित रखने के लिए देश के रक्षा बजट को और बढ़ाने की आवश्यकता थी।

देश में जातीय संघर्ष बढ़ रहा है, जिससे कभी-कभी लगता है कि हम गृह युद्घ की ओर बढ़ रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है।

बात महंगाई पर करे।  जो चीनी खुले बाजार में 16/17 रू0 किलो थी आज वही चीनी आज 40 रूपये किलो खुले बाजार मे बिक रही है। चने की दाल जो 40 रूपये किलो थी आज वही 110 से 120 रूपये किलो बिक रही है, अरहर उर्द की दाल की बात तो छोडिय़े देश के किसानो पर यह इल्जाम लगाया जाता है कि किसानों ने दाल की खेती से मुॅह मोड़ लिया है। जिससे महंगाई बढ़ी है। देश मे पर्याप्त चीनी उत्पादन के बाद चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं।  सरकार ने किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान नही किया है। जिससे आज भी किसान अपने भुगतान को लेकर आन्दोलन कर रहे हैं, अथवा आत्महत्या करने को मजबूर हंै।

इस समय देश का किसान चाहता है कि उसे सस्ती खेती करने के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध कराये जाएं। सरकार को चाहिए कि वह किसान के लिए ऐसे कारगर उपाय करे जिससे किसान की खेती की उपज बढ़े और उसे अपनी फसल के उत्पादन का इस स्थिति के लिए मोदी सरकार जितना बेहतर कर सके उतना ही अच्छा होगा क्योंकि 2019 अब दूर नही है।

चुन्नीलाल