डिजिटल युग में समावेश की चुनौती बनी एक समस्या

  • 2016-11-02 06:30:29.0
  • डा. भरत झुनझुनवाला
डिजिटल युग में समावेश की चुनौती बनी एक समस्या

जिस प्रकार स्टीम इंजन ने लोगों का रोजगार छीन लिया, उसी प्रकार फोटो कापी मशीन ने टाइपिस्टों का, ओला ने टैक्सी स्टैंडों का, कम्प्यूटर ने सांख्यिकी गणित करने का और ई-मेल ने डाकिए का रोजगार हड़प लिया है। जिस प्रकार ट्यूबवेल और टै्रक्टर ने खेत मजदूरों के नए रोजगार बनाए थे, उसी प्रकार फोटोकापी, कॉल सेंटर, मोबाइल डाउनलोड आदि में नए रोजगारों का सृजन हो रहा है। लेकिन जिस प्रकार खेत मजदूर की आय जुलाहे की आय की तरह न्यून बनी रही, उसी प्रकार मोबाइल हाथ में लिए हुए श्रमिक की आय न्यून बनी हुई है।

मोबाइल फोन बनाने वाली मशहूर कंपनी एप्पल के मुख्याधिकारी टिम कुक ने कहा है, 'आने वाले समय में वह भारत को दूसरे चीन में परिवर्तित होते देख रहे हैं। एप्पल की आई फोन की बिक्री में गत वर्ष 50 प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।' ज्ञात हो कि चीन में एप्पल के मोबाइल फोन की बिक्री में गत तिमाही में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। टिम कुक का मानना है कि भारत के नागरिक तीव्र गति से डिजिटल इकॉनोमी में प्रवेश कर रहे हैं। भविष्य में बड़ी संख्या में जनता इंटरनेट सेवा का उपयोग करेगी। डिजिटल इकोनॉमी के प्रभाव को समझने के लिए हमें पीछे जाना होगा। 18वीं सदी में स्टीम इंजन का निर्माण हुआ था। कोयले की खानों से पानी को निकालना तथा गहराई से कोयले की ट्राली को खींचना संभव हो गया था। कोयला निकालने की लागत कम हो गई। बाजार में कोयला सस्ता हो गया। शीघ्र ही कपड़ा मिलों ने करघों को स्टीम ईंजन से चलाना शुरू कर दिया। कर्मियों द्वारा दस गुना कपड़ा बुना जाने लगा। मैनचेस्टर के पावरलूम पर बना कपड़ा सस्ता पडऩे लगा। इस सस्ते कपड़े का भारत में आयात हुआ। इस सस्ते कपड़े के आगे हमारे जुलाहे पस्त हो गए। तमाम बेरोजगार हो गए, लेकिन दूसरे आविष्कारों ने रोजगार बनाए। बिजली से ट्यूबवेल चलाए गए और सिंचाई का भारी विस्तार हुआ। टै्रक्टर से अधिक भूमि में खेती करना संभव हो गया। बेरोजगार मजदूर खेती में खप गए, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में कोई उछाल नहीं आया। उसके घर में बिजली पहुंची, लेकिन वेतन न्यून बने रहे। इस प्रकार स्टीम इंजन के अविष्कार ने भारत में तमाम जुलाहों को संकट में डाला और फिर उस संकट से उठाकर पूर्ववत गरीबी के स्तर पर पुनस्र्थापित कर दिया। डिजिटल इकोनॉमी का भी लगभग ऐसा ही प्रभाव दिख रहा है।

जिस प्रकार स्टीम इंजन ने लोगों का रोजगार छीन लिया, उसी प्रकार फोटो कापी मशीन ने टाइपिस्टों का, ओला ने टैक्सी स्टैंडों का, कम्प्यूटर ने सांख्यिकी गणित करने का और ई-मेल ने डाकिए का रोजगार हड़प लिया है। जिस प्रकार ट्यूबवेल और ट्रैक्टर ने खेत मजदूरों के नए रोजगार बनाए थे, उसी प्रकार फोटोकापी, कॉल सेंटर, मोबाइल डाउनलोड आदि में नए रोजगारों का सृजन हो रहा है। जिस प्रकार खेत मजदूर के घर बल्ब जलने का चमत्कार हुआ था, उसी प्रकार आज श्रमिक के घर में फ्रीज, टीवी और मोबाइल पहुंच गया है। लेकिन जिस प्रकार खेत मजदूर की आय जुलाहे की आय की तरह न्यून बनी रही, उसी प्रकार मोबाइल हाथ में लिए हुए श्रमिक की आय न्यून बनी हुई है। दूसरी तरफ बड़ी कंपनियों के लाभ में लगातार इजाफा हो रहा है। टैक्सी स्टैंड का धंधा चौपट है, पर ओला मालामाल है। समस्या वैश्विक है। अमरीकी सरकार की संस्था यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डिवेलपमेंट के 2014 के अध्ययन के अनुसार डिजिटल इकोनॉमी से वैश्विक आय में वृद्धि हुई है, परंतु अमरीकी श्रमिकों की औसत आय में गिरावट आई है। विश्व बैंक ने वल्र्ड डिवेलपमेंट रपट 2016 में कहा है कि डिजिटल इकोनॉमी से गरीब की तुलना में अमीर को अधिक लाभ हुआ है। विकसित देशों के संगठन 'आर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-आपरेशन एंड डिवेलपमेंट' के अनुसार श्रम बाजार में मध्यम स्तर के रोजगार समाप्त हो रहे हैं। एक तरफ ऊंचे वेतन देने वाले मु_ी भर उच्च स्किल के रोजगार हैं, तो दूसरी तरफ न्यून वेतन देने वाले रोजगार हैं। श्रम की आय न्यून बनी हुई है। फैक्टरियों में आटोमेटिक मशीनों के उपयोग से श्रम की मांग में गिरावट आ रही है। ऐसी ही स्थिति अपने देश में बनी हुई है। एक स्वतंत्र एनजीओ द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि वर्ष 2011 में देश में नौ लाख रोजगार उत्पन्न हुए थे। इसके बाद रोजगार सृजन की गति निरंतर गिर रही है। वर्ष 2015 में मात्र 1,35,000 रोजगार उत्पन्न हुए हैं। रोजगार के इस हनन में डिजिटल इकोनॉमी का महत्त्वपूर्ण योगदान है।

सामान्य श्रमिक की दिहाड़ी अपने स्थान पर टिकी हुई है। उसके जीवन स्तर में सुधार मुख्यत: माल के सस्ते हो जाने से हुआ है, जैसे 800 रुपए में सस्ते मोबाइल उसे उपलब्ध हो गए हैं। लेकिन भूखे पेट उसके लिए मोबाइल किस काम का? कुछ विद्वानों का मानना है कि जनता को डिजिटल स्किल्स दिला दें, तो वे डिजिटल इकोनॉमी में उन्नत रोजगार प्राप्त कर सकेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी। इस संभावना पर बीता समय प्रकाश डालता है। बीती दो सदियों में अपने देश में शिक्षा का भारी विस्तार हुआ है, लेकिन शिक्षित बेरोजगारों का बाहुल्य हो गया है, क्योंकि एक कर्मी द्वारा बनाया गया सॉफ्टवेयर 100 टेलीफोन आपरेटरों का रोजगार छीन लेता है। अत: डिजिटल स्किल से व्यक्ति विशेष को अवश्य लाभ होगा परंतु सामान्य श्रमिक के लिए यह घाटे का ही सौदा रहेगा। एक नई प्रकार की अर्थव्यवस्था बन रही है। मु_ी भर श्रमिक रोबोटों तथा कम्प्यूटरों के द्वारा कारखाने संचालित करेंगे। चीन में एक कारखाना लगा है, जिसमें उत्पादन का पूरा काम रोबोट द्वारा किया जाता है। मशीन संचालन के लिए एक भी व्यक्ति की आवश्यकता नहीं होती है।

कारखाने में चंद इंजीनियर ही कार्यरत हैं, जो रोबोट की देखभाल करते हैं। ऐसी कंपनियों द्वारा पूरी जनता की जरूरतों के कपड़े, जूते, किताबों एवं मोबाइल फोन इत्यादि का उत्पादन कर दिया जाएगा। आम आदमी के रोजगार तेज रफ्तार से सिकुड़ेंगे और बेरोजगारी की समस्या और भी भयंकर रूप धारण कर लेगी। जैसा कि अपने देश तथा विकसित देशों की तमाम रपटें बता रही हैं। एक तरफ अमीरी का जोर है, तो दूसरी ओर बेरोजगारी और मायूसी। यह मायूसी इस समय कम दिख रही है, क्योंकि बेरोजगार भी मोबाइल पर गेम खेलकर मस्त हैं। बहरहाल यह परिस्थिति टिकाऊ नहीं है। बेरोजगारी का त्रास शीघ्र ही सामने आएगा। उसके बाद इस स्थिति पर नियंत्रण कर पाना और भी दुष्कर कार्य हो जाएगा। इस दुरुह स्थिति को स्वर्णिम दुनिया में बदला जा सकता है। उत्पादन के लिए श्रम की जरूरत कम होती जा रही है। अब तक की मान्यता थी कि व्यक्ति को जीविका के लिए श्रम करना जरूरी है। परंतु जब अर्थव्यवस्था को श्रम की जरूरत ही नहीं है, तो श्रमिक श्रम कहां करेगा? अत: जीविका को श्रम से अलग करना पड़ेगा। कार्ल माक्र्स ने सोचा था कि सोशलिस्ट इकोनॉमी में श्रम की जरूरत नहीं रह जाएगी। लोग अपने पसंद का कार्य करेंगे। मौजूदा हालात की पड़ताल करें, तो पाएंगे कि ऐसी परिस्थिति बन भी रही है। जरूरत है कि देश के हर नागरिक को जीविका के लिए पर्याप्त आय बिना श्रम के उपलब्ध करा दी जाए। उसकी जीविका की गारंटी हो। इसके बाद उसकी इच्छा है कि वह पार्क में चिडिय़ा का संगीत सुनेगा अथवा मोबाइल में गेम्स खेलेगा। यदि जीविका को श्रम से जोड़े रखा गया, तो श्रम के अभाव में जीविका संकट में आएगी और विस्फोट होगा।