स्नातक होकर ही नियमित शिक्षक बनेंगे शिक्षामित्र

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लखनऊ। शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षक बनाने के मकसद से सरकार कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर कराने की कवायद में जुटी है। प्रस्ताव के मुताबिक स्नातक शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय बीटीसी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद नियमित शिक्षक के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। वहीं इंटरमीडिएट उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा के जरिये बीटीसी ट्रेनिंग दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से अनुमति लेगा। बीटीसी ट्रेनिंग पूरी करने वाले इंटरमीडिएट उत्तीर्ण शिक्षामित्र जैसे-जैसे स्नातक की उपाधि हासिल करते जाएंगे, उन्हें वैसे-वैसे नियमित शिक्षक नियुक्त किया जाएगा। एनसीटीई ने स्नातक उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय ट्रेनिंग कराने के लिए राज्य सरकार को 14 जनवरी 2011 को अनुमति दी थी। एनसीटीई की अनुमति मिलने के बाद 58,986 स्नातक शिक्षामित्रों के पहले बैच की ट्रेनिंग अगस्त 2011 से शुरू कर दी गई थी जो 2013 में पूरी होगी। ट्रेनिंग पूरी होने पर पहले बैच के स्नातक शिक्षामित्रों को विनियमित कर दिया जाएगा। 64000 स्नातक शिक्षामित्रों के दूसरे बैच की ट्रेनिंग जुलाई 2013 से शुरू करने की योजना थी जिसे अब जुलाई 2012 से चालू करने का इरादा जताया गया है। जून 2014 में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दूसरे बैच के स्नातक शिक्षामित्रों को भी समायोजित कर दिया जाएगा।
राज्य में परिषदीय स्कूलों में शिक्षक नियुक्त होने की शैक्षिक योग्यता स्नातक व बीटीसी है जबकि एनसीटीई द्वारा निर्धारित अर्हता इंटरमीडिएट और बीटीसी है। इसी आधार पर विभाग ने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण 46000 शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा के जरिये बीटीसी कराने के लिए एनसीटीई से अनुमति लेने का इरादा जाहिर किया है। विभाग की मंशा है कि इंटर पास शिक्षामित्रों की बीटीसी ट्रेनिंग जुलाई 2013 से शुरू करा दी जाए।
दो वर्षीय ट्रेनिंग पूरी करने वाले इंटरमीडिएट उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षक नियुक्त होने के लिए पहले दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से स्नातक की उपाधि हासिल करनी होगी। जैसे-जैसे वे स्नातक होते जाएंगे, उनका विनियमितीकरण होता जाएगा। शिक्षामित्रों के विनियमितीकरण के सिलसिले में बेसिक शिक्षा निदेशालय की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को न्याय और वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है। कार्मिक विभाग के अनुमोदन के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

 

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