मैनेजमेंट : कमाई में अव्वल, पढ़ाई में फिसड्डी

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ग्रेटर नोएडा। महामाया प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज कमाई में आगे, लेकिन पढ़ाई में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। अब औंधे मुंह गिरे एमबीए के परीक्षा परिणाम ने यह साबित भी कर दिया है कि कॉलेजों में शिक्षा का स्तर गिरा है। पिछले वर्ष के मुकाबले परिणाम 15 फीसद तक गिरा है और हजारों छात्र फेल हुए हैं। लाखों रुपये की फीस गंवाने के बाद परीक्षा परिणाम छात्रों और अभिभावकों को हैरान करने वाला है।
श्रेणी सुधार (कैरी ओवर) परीक्षा में यदि ऐसे छात्र सफल नहीं हुए, तो छात्र एक साल पीछे हो जाएंगे।
एमबीए का परीक्षा परिणाम सोमवार को कॉलेजों को उपलब्ध हो गया। औसत परिणाम ने कॉलेजों के कान खड़े कर दिए हैं। एमबीए में 31 प्रतिशत छात्रों का फेल होना बड़ा सवाल है। एमटीयू का पहला बैच ही पढ़ाई में फिसड्डी साबित हो रहा है। एमटीयू से संबद्ध प्रदेश में तकरीबन 243 मैनेजमेंट कॉलेज हैं। नॉलेज पार्क में इनकी संख्या 40 के करीब है, जिनके सिर्फ 65 फीसद ही छात्र कामयाब रहे हैं। अमूमन सभी कॉलेज एमबीए के लिए तीन से चार लाख रुपये तक फीस के रूप में वसूलते हैं। गत वर्ष एमबीए का बैच जीबीटीयू से निकला था। इस बार एमटीयू का यह पहला बैच निकला है। पहले वर्ष ही कॉलेजों को खराब परिणाम का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, कॉलेजों ने जैसे-तैसे दाखिला ले लिया, लेकिन शैक्षणिक व्यवस्था नहीं सुधरी। वे छात्रों को पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने में नाकाम रहे। इस परिदृश्य ने इंजीनियरिंग के परिणाम पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। विषम सेमेस्टर में 40 फीसद छात्र फेल रहे थे। इस बार भी इससे भी खराब स्थिति के संकेत मिल रहे हैं। सवाल यह है कि श्रेणी सुधार परीक्षा में भी छात्र उत्तीर्ण न हो सके तो क्या होगा? ईयर बैक वाले छात्रों की लंबी फेहरिस्त होगी, जिससे कॉलेजों की साख पर निश्चित रूप से बट्टा लगेगा। इस स्थिति ने विवि प्रशासन को भी संकट में डाल दिया है। एमटीयू के परीक्षा नियंत्रक जेपी पांडेय का कहना है कि पिछले वर्ष फाइनल एग्जाम के साथ ही कैरी ओवर परीक्षाएं भी हुई थीं, जिससे परिणाम का प्रतिशत ज्यादा था। इस बार ऐसा नहीं है। कैरी ओवर परीक्षाएं जून में प्रस्तावित हैं, जिसमें विषम और सम सेमेस्टर दोनों के अनुत्तीर्ण छात्र शामिल होंगे।

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