पूर्वोत्तर क्षेत्र में बढ़ती अशांति

राजनीति

अशोक कुमार पाण्डेय
हालांकि भारत को आतंवाद से जूझते हुए लगभग तीन दशकों का समय बीत चुका है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी जो बात हुई है वह यह है कि एक तरफ देश आतंकवाद से जूझने में अपनी पूरी शक्ति तथा ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहा है यही आतंकवाद थमने के बजाए दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसके बढ़ते क्रिया कलापों एवं प्रभाव को देखते हुए कहा जा सकता है कि आतंकवाद का पैर उखड़ नही रहा है बल्कि और मजबूती से जमता जा रहा है जो निश्चित ही पूरे देश के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। आतंकवाद ने जब समूचे विश्व को हिलाकर रख दिया है फिर भला भारत इससे कैसे अछूता रह सकता है। इसी का नतीजा है कि पहले पंजाब और फिर जम्मू कश्मीर अब पूरा देश आतंकवाद की चपेट में है।
कारगिल युद्घ में हारने के बाद पाकिस्तान तथा उसकी आतंकी गतिविधियां शांत होकर बैठ जाएंगी ऐसा सोचना शायद भारी भूल कही जाएगी क्योंकि उसकी मंशा भारत को तबाह कर देने वाली हमेशा से रही है। फिर ऐसी दशा में वह चुप कैसे रह सकता है। इतना ही नही आज इस्लामी आतंकवाद भारत के अलावा चीन, रूस, अमेरिका सहित तमाम देशों में अपने पैर जमाने का लगातार प्रयास कर रहा है। लेकिन भारत में इस्लामी आतंकी गतिविधियों को वह देश के पूर्वोत्तर एवं पश्चिम में केन्द्रित कर समूचे देश पर दोनों तरफ से दबाव बनाने की नायाब कोशिशों में जुटा हुआ है। इसके लिए देश के पूर्वोत्तर भू भाग में जारी उसकी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी होना अति आवश्यक हो जाता है। भारत बंगलादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के 10 जिलों में गैर कानूनी ढंग से एक हजार से ज्यादा मस्जिदों का निर्माण भी किया जा चुका है। जहां आतंकवादी तथा आईएसआई के एजेंट पनाह पाते रहते हैं। यह निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है। सीमा से सटे जनपदों में ये बंगलादेशी घुसपैठिए यहां स्थानीय नेताओं एवं बिकाऊ पुलिस की मदद से रहते हुए तेजी से अवैध मस्जिदों का निर्माण करते जा रहे हैं। वहीं उसी में निवास भी करते हैं। आश्चर्य जनक तथ्य तो यह भी है कि उन बंगलादेशी घुसपैठियों ने उत्तर बंगाल एवं असम के तमाम जनपदों में न केवल स्थाई नागरिकता तक हासिल कर ली है बल्कि मुंह मांगी रकम देकर रवहां की जमीनें भी हथिया रखी है। जब इसकी समीक्षा हुई तो पता चलाकि ये सब सोची समझी गंभीर साजिश के तहत आईएसआई के इशारे पर किया जा हरा है। इतना ही नही सीमा के 5 किमी क्षेत्र में हाल के दिनों में भारी मात्रा में जनसंख्या का अनुपात दिन दूना रात चौगुना ही तर्ज पर बढ़ चुका है एक हजार से अधिक मस्जिदें गैर कानूनी ढंग से निर्मित हुई है एवं इतनी ही संख्या में मदरसों का भी निर्माण कराया जा चुका है। ये अधिकांश मस्जिदें उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद, नदिया एवं मालदा में बनाई जा चुकी है। जबकि किसी भी मस्जिद के निर्माण की अनुमति राज्य सरकार से प्राप्त नही की गई है। मदरसे एवं मस्जिदों के निर्माण के लिए भारी भरकम धनराशि कहां से आई, सरकार आज तक पता नही लगा सकी है।
पश्चिम बंगाल में वर्ष 1971 में हिंदुओं की जनसंख्या 3 करोड़ 46 लाख 11 हजार थी, जो वर्ष 1991 में 5 करोड़ 8 लाख 66 हजार 934 पर पहुंच गयी। जबकि दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की संख्या 90 लाख 64 हजार 388 थी जो वर्ष 1991 में 1 करोड़ 60 लाख 75 हजार 836 हो गयी। भारत बंगलादेश सीमा पर स्थित मालदा जिले में 1991 हिंदू जनसंख्या 13 लाख 77 हजार 844 थी, जबकि 1971 में यह संख्या 9 लाख 13 हजार 283 थी। इसी तरह नदिया जिले में 1947 में हिंदुओं की जनसंख्या 16 लाख 93 हजार और मुसलमानों की जनसंख्या 5 लाख 20 हजार 571 थी 1991 में नदिया में मुसलमानों की जनसंख्या 9 लाख 59 हजार 198 हो गयी, जबकि हिंदुओं की जनसंख्या 28 लाख 63 हजार 891 हुई। मुर्शिदाबाद में 1991 मेें हिंदुओं की संख्या 12 लाख 52 हजार थी लेकिन 20 वर्ष बाद मुर्शिदाबाद में मुसलमानों की आबादी 29 लाख 10 हजार पर पहुंची एवं हिंदुओं की जनसंख्या 11 लाख 72 हजार 930 एवं मुसलमानों की जनसंख्या इस जिले लगभग दोगुनी हो गयी। भारत बांगलादेश सीमा पर पिछले 20 वर्षों में हिदुओं के मुकाबले मुस्लिम जनसंख्या में 5 से 15 प्रतिशत की वृद्घि हुई है। इस अप्रत्याशित जनसंख्या वृद्घि में मूलभारतीय मुसलमानों के बजाए बंगलादेशी मुसलमानों की वृद्घि भारी मात्रा में हुई है। 1971 में भारत पाकिस्तान युद्घ के बाद कुछ पाकिस्तानी जो कि बंगलादेश में रह रहे थे, बंगलादेश छोड़कर पश्चिम बंगाल में बस गये। चूंकि उन्हें बंगला भाषा अच्छी तरह से आती है इसलिए उन्हें आसानी से पहचाना नही जा सकता है। जहां तक देश की सुरक्षा का सवाल है तो इसमें इन बंगलादेशी घुसपैठियों द्वारा केवल समस्या ही पैदा नही की जा रही है बल्कि ये आंतरिक सुरक्षा के साथ तमाम तरह से भारत के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो यह है कि अकेले उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में ही इनकी बहुतायत में भारी मात्रा में वृद्घि हो चुकी है। इनको सुबह से देर रात्रि तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कूड़ा बीनते हुए तथा सुनसान खाली स्थानों पर झोंपडिय़ां बनाकर निवास करते देखा जा सकता है। इन क्षेत्रों में अलीगंज, इंदिरा नगर, इस्माइलगंज कमता चिनहट, गोमती नगर, सहित पश्चिम उलखन के क्षेत्र में प्रमुख रूप से है। एक तरफ जहां हम बार बार इन बंगलादेशी घुसपैठियों को देश के बाहर खदेड़े देने की बात जोर शोर से करते हैं, वही प्रत्येक भारतीय नागरिक को नागरिक पहचान पत्र समय समय पर देने की बात करते हैं, लेकिन इसमें हम कितनी सफलता प्राप्त कर पाए हैं। इसका इनकी देश में बढ़ती आबादी से अंदाजा अत्यंत ही आसानी से लगाया जा सकता है। आतंकवाद के मामले में देश को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है जो कि निश्चित ही राष्ट्र को कमजोर कर देने का षडयंत्र कहा जा सकता है। इतना ही नही भारत की एकता अखंडता को छिन्न-भिन्न करने तथा कमजोर करने के इरादे से पाकिस्तान तथा आईएसआई द्वारा हर वह कार्यवाही की जा रही है जो संभव हो सकती है। इसमें देश के लगभग प्रत्येक हिस्से में खून-खराबा मार-काट आतंकवादी कार्रवाईयों अर्थव्यवस्था को चौपट कर देने के लिए देश में भारी मात्रा में जाली नोटों का प्रचलन शामिल है। हमें इस बयान को किसी दशा में नजर अंदाज नही करना चाहिए जिसमें यह कहा गया है कि जम्मू कश्मीर तो मात्र एक बैस कैंप है तथा हिमाचल प्रदेश द्वार। यह भी चेतावनी दी गयी है कि वह दिन ज्यादा दूर नही है, जब दिल्ली के लालकिले पर इस्लामी परचम फहराने लगेगा। हमारे लिये तो भारत का हर प्रदेश जम्मू कश्मीर के समान हो चुका है क्या इस वक्तव्य से यह नही माना जाना चाहिए कि आईएसआई तथा उसके आतंकवादियों ने पूरे देश को धीरे धीरे अपने जाल में जकडऩा शुरू कर दिया है। आतंकवादी कार्रवाईयां ही नही बल्कि इन्होंने भारतीय संस्कृति को भी अब अपने प्रभाव में ले रखा है जिससे भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर भी खतरा साफ मंडराने लगा है। जम्मू कश्मीर तथा देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में लगातार हो रही घुसपैठों के चलते जहां इनकी जनसंख्या में भारी वृद्घि होती जा रही है, वहीं ये अल्पसंख्यक न होकर बहुसंख्यक कहे जाने के हकदार बनते जा रहे हैं। लेकिन हम हैं कि लगातार अभी भी अल्पसंख्यक की ही रट लगाये जा रहे हैं इसके लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की रिपोर्ट देखी जानी चाहिए तथा आयोग के पूर्व अध्यक्ष ताहिर महमूद द्वारा दिये गये बयान का संज्ञान लिया जाना चाहिए। इस हकीकत से नजरे चुराना देश के लिए आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। जहां एक तरफ हम जनसंख्या नियंत्रण की दुहाई देते फिरते हैं वही हम राजनीति के चक्कर में इतनी भी हिम्मत नही कर पा रहे हैं कि देश में बढ़ती अवैध नागरिकों की भारी जनसंख्या को नियंत्रित करने का ही कोई जतन कर सके। यदि समय रहते हम इस तरफ ध्यान न दे सकें तथा कोई प्रभावी कदम नही उठा सके तो फिर वह दिन अब ज्यादा दूर नही रह जाएगा जब भारत के बंटवारे की मांग की जाने लगेगी। जहां हमें एक तरफ देश के चारों तरफ कस रहे इस्लामिक आतंकवादी शिकंजे से पल पल सावधान रहना होगा वहीं देश के अंदर चल रही राष्ट्रद्रोही गतिविधियों पर भी सतर्क दृष्टि रखनी होगी। जो स्थितियां देश की सीमाओं पर तथादेश के अंदर बनती जा रही हैं। वह एक गंभीर साजिश का हिस्सा कही जा सकती है। कुल मिलाकर देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में मस्जिदों तथा मदरसों का अवैध निर्माण तथा इनकी गतिविधियां जिस तरीके से जारी हैं उससे यह निश्चित समय लिया जाना चाहिए कि ये देश पर दो तरफ हमले का संकेत है। हमें इससे सतत सतर्क तथा होशियार रहने की आवश्यकता है। इसको किसी भी दशा में इनकार करना देश के लिए अत्यंत आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि देश का पूर्वोत्तर क्षेत्र भी अब अशांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
साभार

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