आफ्टर आल, हम देश के दामाद हैं

राजनीति

आर. डी. वाजपेयी
लखनऊ। अभी मैं इस तथ्य से अनभिज्ञ हूँ कि जो कुछ कहूंगा उसे हमारे पाठक हजम कर लेंगे। फि र सोचता हूं कि हमारे देश की जनता का हाजमा इतना अच्छा है कि सब कुछ हजम हो जाता है। उनका हाजमा कंकड़ पत्थर हजम करने वाला है। तभी तो हमारे यहां सड़े सड़े गेहॅू चावल राशन में वितरित होता हैं और लोग लाइन लगाकर मजा लेते रहते हैं। फि र यह तो राजनीति है। मुझे आज भी याद है जब मुद्दत पहले मेरी शादी हुयी थी और मैं ससुराल गया था तो वहां मेरे स्वागत के लिए मुहल्ले वाले और आस पास के रिश्तेदार आये थे और इतनी दक्षिणा मिली थी कि शायद मेरे जन्म मुण्डन के समय भी नही मिली होगी। वह वक्त और था लेकिन आज भी भारत जैसे संस्कृति प्रधान और रीति रिवाजों वाले देश में जब कोई दामाद अपनी ससुराल जाता है तो कम कस कम पूरा गांव उसे जीजा कहता है और हैसियत के अनुसार स्वागत करता है, तो फि र देश के दामाद या जीजा के साथ उपेक्षित व्यवहार क्यों हो रहा है। जबकि आज भी रिवाज के मुताबिक कोई भी सास शादी के समय अपने दामाद को कुछ रूपये चुराकर (सबको बिना कुछ बताये) मुटठी में भेंट स्वरूप थमा देती है तो देश के दामाद जी (राबर्ट वाड्रा ) को छुपा कर दिया तो उसको उजागर करना ठीक नही है। लेकिन जो हो गया है वह हो गया वैसे गौर करने वाला विषय यह है कि किसने छोड़ा है देश को, जिसने यहां हाथ न साफ किया हो इस देश में चींटी से लेकर हाथी तक और सुई से लेकर तोप तक में घोटाला ही घोटाला है, लेकिन प्रश्न वही पुराना है कि आप क्या कर लेंगे? देश का हर व्यक्ति केजरीवाल की तरह नही कर सकता, उसको नौकरी व्यवसाय व परिवार से कहां फु रसत नही है। हां कुछ चन्द लोग जिन्हें आगे राजनीति करनी है वे ही इस प्रकार धरना प्रदर्शन बवाल कर सकते हैं। आज देश हो या प्रदेश हो बाड्रा हो या कांग्रेस पार्टी हो। लगभग सभी पार्टी के नेताओं की आय दिन दूनी रात चौगुनी हुई है। प्रदेश की बसपा की पूर्ववर्ती सरकार इसका विशेष उदाहरण है जहां शायद कोई मंत्री बचा है जिसका पुलिन्दा नही खुला है, हम कुछ नही कर सकते है ।
ममता बनर्जी जी ने चुनाव के पहले अपनी सुविधानुसार संप्रग से पल्ला झाड़ लिया। 2014 भी दूर नही है। इस वक्त जो देश में हो रहा हैं यदि सरकार जाती है जो कि असम्भव लगता है। क्योंकि जब तक सपा बसपा है तब तक ये सरकार चलेगी, और ड्रामे चाहे वह सलमान खुर्शीद का हो या टूजी का ये सब तो ऐसे ही चलते रहेंगे, और यह सब जनता के पास इसे हजम करने के अलावा कोई और रास्ता भी नही है। केजरीवाल द्वारा लगता है सलमान खुर्शीद के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
यदि खुर्शीद इस्तीफा दे भी देते हैं तो एक मंत्री के इस्तीफे से क्या होगा, जबकि अन्ना और केजरीवाल के कथनानुसार प्रधान मंत्री सहित लगभग सभी मंत्री दागी हैं। एक और जांच का विषय समझ में आता है अब जब रार्बट वाड्रा को लेकर इतना हल्ला हो चुका है तो और भी मंत्री, नेताओं के भी दामाद वो अवश्य होंगें। तो क्या उन्हें भी इसी प्रकार की भेंट ( राबर्ट वाड्रा जैसी) दी गई हैं या देने की तैयारी चल रही है। हमारे ऐसे भाग्य कहां हैं हम तो ठहरे आम आदमी अर्थात स्टूपिड कामन मैन। जिससे देश में केवल वोट देने का अधिकार है लेकिन यहां भी एक समस्या है जब हमारे क्षेत्र में अमुक पार्टी के टिकट पर चुना गया प्रत्याशी पद व पैसे के टिकट पर चुना गया प्रत्याशी पद व पैसे के चक्कर में अन्य दलों में चले जाते हैं। और देखने के अलावा कुछ नही कर सकते है।
बात दामाद की हो रही है तो अब भेंट की चीज या रकम वापस लेना अपने देश की सभ्यता के प्रतिकूल है। इसलिए यह मामला आज नही तो कल ठंडे बस्ते में चला जायेगा आफ्टर आल वे देश के दामाद हैं।

 

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